CG News: रायपुर साहित्य उत्सव में स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण

CG News: रायपुर साहित्य उत्सव में स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण

CG News: रायपुर साहित्य उत्सव में स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण

CG News: रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के पहले दिन नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में जनसंपर्क विभाग द्वारा देश के शीर्षस्थ साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल और उनके साहित्य का स्मरण किया गया, ‘स्मृति शेष स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल: साहित्य की खिड़कियां’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में साहित्य, प्रशासन, पत्रकारिता और फिल्म से जुड़े वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर भावपूर्ण संवाद किया.

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक परंपरा और शुक्ल की मौलिकता

परिचर्चा के प्रथम वक्ता, भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं साहित्यकार डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी ने कहा कि, छत्तीसगढ़ ने पिछले 200 वर्षों में हिंदी साहित्य को बार-बार नई दिशा दी है, जिसमें विनोद कुमार शुक्ल भी शामिल हैं, उन्होंने बताया कि, शुक्ल किसी विचारधारा या कवि के अनुगमन नहीं करते थे, उनका लेखन पूरी तरह मौलिक है, उनकी रचनाओं में साधारण मनुष्य अपनी गरिमा और संवेदना के साथ उपस्थित होता है, शोषितों का जीवन, सरल भाषा, गढ़े हुए मुहावरे और गहरी अनुभूति उनके साहित्य की पहचान है.

स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं साधारण मनुष्य के असाधारण जीवन का  दस्तावेज – Jogi Express

शुक्ल की रचनाओं की सार्वभौमिकता

नई दिल्ली की युवा कथाकार एवं पत्रकार सुश्री आकांक्षा पारे ने कहा कि, कई लोग शुक्ल की रचनाओं को दुरूह मानकर खारिज कर देते हैं, लेकिन कई पाठकों को इन रचनाओं से गहरा और आत्मीय लगाव होता है, उन्होंने कहा कि, शुक्ल मनुष्यता के पुजारी थे और उनकी रचनाएँ मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हैं.

साधारण जीवन में खुश रहने की कला

जनसंपर्क विभाग के उप संचालक एवं युवा साहित्यकार श्री सौरभ शर्मा ने कहा कि, शुक्ल का साहित्य यह सिखाता है कि, सामान्य जीवन जीते हुए भी मनुष्य कैसे खुश रह सकता है, वे बड़े कवि और लेखक थे, लेकिन उससे भी बड़े इंसान थे, उन्होंने बताया कि, शुक्ल के साथ समय बिताना सुकून से भरा अनुभव होता था और उनकी रचनाएँ पाठकों में कौतुक और उत्सुकता जगाती हैं.

मिट्टी से उपजी कथाएँ और प्रतीकात्मक भाषा

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं लेखक अनुभव शर्मा ने कहा कि, शुक्ल की रचनाएँ पढ़ने के बाद उनका साहित्य “जीया” जा सकता है, उनकी कथाओं में प्रतीक और बिंब हमारे आसपास के जीवन में दिखाई देते हैं, उन्होंने बताया कि, शुक्ल ने उन्हें लिखने के लिए प्रेरित किया और उनकी रचनाओं में छोटे-छोटे प्रतीक जैसे ‘पेड़ों का हरहराना, चिड़ियों का चहचहाना’ बार-बार मिलते हैं.

साहित्य ने दी आत्मीय पहचान

अभिनेत्री सुश्री टी.जे. भानु ने कहा कि, साहित्य ने उन्हें बचपन से संबल दिया है, उन्होंने बताया कि, जब उन्होंने पहली बार शुक्ल की कविता पढ़ी, तो उन्हें लगा कि, यही वे बातें हैं, जिन्हें वे स्वयं कहना चाहती थीं, वे हर वर्ष 1 जनवरी को शुक्ल के जन्मदिन पर रायपुर आती थीं और उनसे मिलती थीं, उनकी किताबों में जनमानस की सच्ची और आत्मीय बातें हैं.

साहित्य की अनेक खिड़कियाँ

परिचर्चा की सूत्रधार डॉ. नीलम वर्मा ने समापन करते हुए कहा कि. स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य की एक नहीं, अनेक खिड़कियाँ हैं, उनके लेखन में गहरी मानवीय करुणा और संवेदना समाई हुई है, वे किसी एक राज्य या देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी रचनाएँ पूरी दुनिया को जोड़ती हैं.

यह भी पढ़ें : CG News: राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने 10वीं-12वीं के मेधावी छात्रों को किया सम्मानित

Vindhya Times
Author: Vindhya Times

विन्ध्या टाइम्स वेब बेस्ड न्यूज़ चैनल है जो विन्ध्य क्षेत्र में एक सार्थक,सकारात्मक और प्रभावी रिसर्च बेस्ड पत्रकारिता के लिए अपनी जाना जाता है.चैनल के माध्यम से न्यूज़ बुलेटिन, न्यूज़ स्टोरी, डाक्यूमेंट्री फिल्म के साथ-साथ विन्ध्य क्षेत्र और मप्र. की ख़बरों को प्रसारित किया जाता है. विन्ध्य क्षेत्र की राजनीति, युवा, सांस्कृतिक, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कल्चर, फ़ूड, और अन्य क्षेत्र में एक मजबूत पत्रकारिता चैनल का उद्देश्य है. विन्ध्या टाइम्स न्यूज़ चैनल की ख़बरों को आप चैनल की वेबसाइट-www.vindhyatimes.in एवं एंड्राइड बेस्ड एप्लीकेशन के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही साथ फेसबुक पेज- https://www.facebook.com/vindhyatimesnews और ट्वीटर में -@vindhyatimes से भी आप ख़बरों को पढ़ सकते हैं. जुड़े रहिये हमारे साथ |

Leave a Comment

और पढ़ें