CG News: डॉ. बुधरी ताती को पद्मश्री सम्मान, बस्तर की महिलाओं के संघर्ष को दिलाया राष्ट्रीय सम्मान
CG News: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा, यह सम्मान उनके 40 वर्षों के निस्वार्थ सामाजिक कार्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया जा रहा है.
कठिन हालातों में भी नहीं रुका उनका सफर
दुर्गम बीहड़ों, पैदल यात्राओं और जानलेवा खतरों के बावजूद डॉ. बुधरी ताती ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, उन्होंने बस्तर के अंदरूनी इलाकों में 545 से अधिक गांवों तक पहुंचकर महिलाओं को जागरूक किया और आत्मनिर्भर बनाया.
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15 साल की उम्र में लिया समाज सेवा का संकल्प
गीदम ब्लॉक के हिरानार गांव की निवासी बुधरी ताती को 1984-85 में गुरमगुंडा आश्रम के लखमू बाबा से समाज सेवा की प्रेरणा मिली, महज 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने तय किया कि, उनका जीवन समाज को समर्पित रहेगा.
प्रशिक्षण से शुरुआत, फिर संघर्षपूर्ण यात्रा
परिवार को समझाने के बाद वे नागपुर स्थित अखिल भारतीय राष्ट्रीय सेवा समिति में प्रशिक्षण के लिए गईं, प्रशिक्षण के बाद रायपुर होते हुए बस्तर में उन्होंने अपने सेवा कार्य की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ाया.

महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
डॉ. बुधरी ताती ने अब तक 500 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया, उन्होंने महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई और स्वरोजगार से जोड़ा, उनका मानना है कि, महिलाओं की आर्थिक मजबूती से ही समाज मजबूत होता है.
पर्यावरण पर दिया खास जोर
उनका काम सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं रहा, उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाए, कई इलाकों में नशा मुक्ति अभियान भी संचालित किए.
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समाज सेवा के लिए त्याग
डॉ. बुधरी ताती ने समाज सेवा को प्राथमिकता देते हुए विवाह नहीं किया, उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के नाम कर दिया, बस्तर के ग्रामीण उन्हें ‘बुआ’ और ‘बड़ी दीदी’ कहकर सम्मान देते हैं, उनकी राह आसान नहीं थी, एक बार अबूझमाड़ क्षेत्र में ग्रामीणों ने धारदार हथियारों से उनका पीछा किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, उनका कहना है, अगर डर जाती, तो आज भी महिलाएं अंधेरे में होतीं.
वृद्धाश्रम और अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी भी निभाई
हिरानार गांव में उन्होंने वृद्धाश्रम की स्थापना की, जहां बेसहारा बुजुर्गों को सम्मान और सहारा मिलता है, साथ ही वे अनाथ और गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं, इस कार्य में उनकी भतीजी अन्ति वेक भी सहयोग कर रही हैं.
22 पुरस्कार, अब पद्मश्री होगा 23वां
डॉ. बुधरी ताती को अब तक 22 पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें 3 राष्ट्रीय स्तर के सम्मान शामिल हैं, पद्मश्री सम्मान उनकी सेवा यात्रा का 23वां और सबसे प्रतिष्ठित सम्मान होगा, यह केवल उनकी उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बस्तर की संघर्षशील महिलाओं की जीत है.
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Author: Vindhya Times
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