Bhopal News: भोपाल में बनेगा फ्यूचर एनर्जी हब, भविष्य की बिजली पर होगा बड़ा शोध

Bhopal News: भोपाल में बनेगा फ्यूचर एनर्जी हब, भविष्य की बिजली पर होगा बड़ा शोध

Bhopal News: भोपाल में बनेगा फ्यूचर एनर्जी हब, भविष्य की बिजली पर होगा बड़ा शोध

Bhopal News: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भोपाल में जल्द ही अत्याधुनिक सोलर रिसर्च पार्क और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना की जाएगी, इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 550 करोड़ रुपये खर्च होंगे, इसके लिए राज्य सरकार ने IISER को 52 एकड़ भूमि आवंटित की है.

सिर्फ सोलर प्लांट नहीं, क्लीन एनर्जी की प्रयोगशाला

यह सेंटर केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह क्लीन एनर्जी की नई तकनीकों का बड़ा रिसर्च हब बनेगा, यहां सूरज, हवा, पानी और ग्रीन हाइड्रोजन से सस्ती, टिकाऊ और अधिक प्रभावी बिजली उत्पादन पर काम किया जाएगा.

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कई विभाग मिलकर करेंगे रिसर्च

इस रिसर्च पार्क को IISER के केमिस्ट्री, फिजिक्स, अर्थ एंड एनवायरनमेंटल केमिस्ट्री, इलेक्ट्रिकल और केमिकल इंजीनियरिंग तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग मिलकर विकसित करेंगे, इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत होगी.

AI, स्मार्ट ग्रिड और ग्रीन हाइड्रोजन पर फोकस

यहां वैज्ञानिक यह भी शोध करेंगे कि, बादलों या रात के समय ऊर्जा को कैसे स्टोर किया जाए और बिना नुकसान के बिजली घरों तक कैसे पहुंचे, सेंटर में AI आधारित एनर्जी मैनेजमेंट, क्वांटम सेमीकंडक्टर, स्मार्ट ग्रिड और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी भविष्य की तकनीकों पर काम होगा.

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छात्रों और युवाओं के लिए नए अवसर

इस सेंटर से छात्रों को किताबों से आगे जाकर लाइव प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्री रिसर्च और हाईटेक लैब्स में काम करने का मौका मिलेगा, इससे स्टार्टअप, पेटेंट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही IISER में एमटेक इन रिन्यूएबल एनर्जी कोर्स शुरू करने की भी योजना है.

13 फरवरी को होगा भूमिपूजन

इस सोलर रिसर्च पार्क का भूमि पूजन 13 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे, कार्यक्रम में वैज्ञानिक, ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधि और नीति निर्माता शामिल होंगे, इसके साथ ही परियोजना का निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा.

भोपाल शहर को क्या मिलेगा

• ग्रीन एनर्जी का बढ़ता उपयोग
• प्रदूषण में कमी
• स्थानीय स्तर पर रोजगार
• नई इंडस्ट्री और निवेश
• स्मार्ट बिजली सप्लाई मॉडल

इन 5 बिंदुओं पर होगा मुख्य काम

• अधिक बिजली बनाने वाले सोलर सेल
• सस्ती ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक
• बिजली ट्रांसमिशन में नुकसान कम करना
• कार्बन उत्सर्जन में कमी
• विंड एनर्जी को किफायती बनाना

IISER निदेशक का बयान

IISER निदेशक प्रो. गोवर्धन वास ने बताया कि, ऊर्जा अनुसंधान के लिए 52 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है, यहां सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी तकनीकों को और अधिक प्रभावी बनाने पर शोध होगा, लक्ष्य है अधिकतम ऊर्जा उत्पादन और बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करना.

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Author: Vindhya Times

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