MP News: मध्य प्रदेश पुलिस में कार्यवाहक पदोन्नति की समीक्षा शुरू, हजारों अधिकारी-कर्मचारियों पर मूल पद पर लौटने का खतरा
MP News: मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर कार्यरत हजारों अधिकारी और कर्मचारियों के लिए नई चुनौती सामने आ गई है. राज्य सरकार द्वारा नए पदोन्नति नियम लागू किए जाने के बाद अब नियमित विभागीय पदोन्नति समिति, डीपीसी, की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके तहत पात्रता पूरी नहीं करने वाले कर्मचारियों का कार्यवाहक प्रभार वापस लिया जा सकता है.
पांच साल से चल रही थी कार्यवाहक व्यवस्था
प्रदेश में नियमित पदोन्नति लंबे समय तक लंबित रहने के कारण वर्ष 2021 से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. अब नए नियम लागू होने के बाद इन सभी मामलों की चरणबद्ध समीक्षा की जा रही है, जिससे विभाग में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
पांढुर्णा से शुरू हुई कार्रवाई
कार्यवाहक पदोन्नति वापस लेने की पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में सामने आई है. यहां 32 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों का अतिरिक्त प्रभार समाप्त कर उन्हें दोबारा आरक्षक पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए गए हैं. विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई नए पदोन्नति नियमों और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है.
सेवा रिकॉर्ड तय करेगा भविष्य
नियमित डीपीसी से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. इसमें गोपनीय प्रतिवेदन, विभागीय दंड, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई और न्यायालय में लंबित मामलों को आधार बनाया जा रहा है. तय मानकों पर खरे उतरने वाले कर्मचारियों को ही नियमित पदोन्नति का लाभ मिलेगा.
करीब एक हजार कर्मचारियों पर तत्काल असर
प्रारंभिक समीक्षा में लगभग एक हजार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे सामने आए हैं, जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा प्रभाव पड़ सकता है. विभागीय सूत्रों के अनुसार अगले कुछ दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है. आगे चलकर यह संख्या 15 हजार तक पहुंच सकती है.
नियमित प्रमोशन पर रहेगा जोर
पुलिस विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी. केवल पात्र अधिकारी और कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति मिलेगी. वहीं, कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि यदि उन्हें मूल पद पर वापस भेजा गया, तो इसका असर उनके मनोबल और कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है.
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Author: Vindhya Times
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