CG News: PDS के चावल में बड़ा बदलाव, 17 लाख लोगों को मिलेगा बेहतर गुणवत्ता वाला अनाज
CG News: गरीब परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए मिलने वाले चावल की गुणवत्ता अब पहले से बेहतर होने वाली है. राज्य सरकार PDS में ‘इंप्रूव्ड राइस’ उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है. नई व्यवस्था के तहत चावल में टूटे हुए दानों यानी Broken Rice की मात्रा को 25 फीसदी से घटाकर अधिकतम 10 फीसदी किया जाएगा. इससे राशन के जरिए मिलने वाले चावल में साबुत दानों की संख्या बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में बेहतर गुणवत्ता का खाद्यान्न मिल सकेगा.
17 लाख से ज्यादा सदस्यों को मिलेगा फायदा
बिलासपुर जिले में इस बदलाव का सीधा असर 6 लाख से अधिक राशन कार्डधारियों पर पड़ेगा. इन परिवारों से जुड़े करीब 17 लाख से ज्यादा सदस्य PDS के जरिए हर महीने राशन प्राप्त करते हैं. सरकार की योजना है कि अगले दो महीनों के भीतर नई गुणवत्ता वाला चावल राशन दुकानों तक पहुंचना शुरू हो जाए. Broken Rice की मात्रा में 15 फीसदी की कमी होने से चावल की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार आने की उम्मीद है, हालांकि तय मानकों को लागू कराने के लिए राशन दुकानों तक पहुंचने वाले चावल की नियमित जांच भी जरूरी होगी.
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बेहतर चावल के लिए बढ़ेगी प्रोसेसिंग
नई व्यवस्था लागू करने के लिए मिलिंग और प्रोसेसिंग प्रक्रिया में भी बदलाव करना पड़ेगा. टूटे दानों की मात्रा कम करने के लिए मिलों को अतिरिक्त तकनीक और बेहतर प्रसंस्करण व्यवस्था का इस्तेमाल करना होगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राशन दुकानों तक पहुंचने वाला चावल निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो. सरकार और संबंधित विभागों के सामने अब गुणवत्ता के साथ-साथ सप्लाई सिस्टम की निगरानी मजबूत रखने की चुनौती भी रहेगी.
हर महीने 18 हजार टन चावल का आवंटन
बिलासपुर जिले के करीब 17 लाख सदस्यों के लिए सरकार हर महीने लगभग 18 हजार टन चावल का आवंटन करती है. मिलिंग, प्रोसेसिंग और परिवहन समेत अन्य खर्चों को जोड़ने पर इसकी औसत लागत करीब 3,500 रुपए प्रति क्विंटल यानी 35 रुपए प्रति किलो बताई जा रही है. इस हिसाब से सरकार हर महीने करीब 63 करोड़ रुपए का मुफ्त राशन उपलब्ध कराती है. नई गुणवत्ता व्यवस्था के बाद इस पूरी प्रक्रिया की लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
सरकार पर बढ़ सकता है अतिरिक्त आर्थिक बोझ
Broken Rice की सीमा 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के लिए चावल की मिलिंग और प्रोसेसिंग में अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होगी. इससे प्रति किलो चावल की लागत बढ़ सकती है और सरकार के खजाने पर मौजूदा 63 करोड़ रुपए से ज्यादा का मासिक वित्तीय भार पड़ने की संभावना है. हालांकि, इसके बदले लाखों राशन कार्डधारियों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध होगा. अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था कब से पूरी तरह लागू होती है और राशन दुकानों तक इसकी सप्लाई किस तरह सुनिश्चित की जाती है.
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Author: Vindhya Times
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