MP News: मध्य प्रदेश में नए जिले और तहसील की मांग पर ब्रेक, केंद्र सरकार ने जारी किया बड़ा आदेश
MP News: मध्य प्रदेश में नए जिले, तहसील और प्रशासनिक इकाइयों के गठन की मांग कर रहे लाखों लोगों को फिलहाल बड़ा झटका लगा है, केंद्र सरकार के ताजा निर्देशों के बाद राज्य में अब जनगणना पूरी होने तक किसी भी नए जिले या तहसील का गठन नहीं किया जा सकेगा.

आधी रात को जारी हुआ आदेश
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 की मध्यरात्रि से मध्य प्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों, थानों और अन्य प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं फ्रीज कर दी गई हैं, इसका मतलब साफ है कि, अब किसी भी तरह का प्रशासनिक पुनर्गठन संभव नहीं होगा.

जनगणना के कारण लिया गया फैसला
सरकार ने स्पष्ट किया है कि, जनगणना के दौरान प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव से आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है, इसी कारण केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि, जनगणना पूरी होने तक प्रशासनिक ढांचे में कोई बदलाव न किया जाए.
ठंडी पड़ीं वर्षों पुरानी मांगें
इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश के कई इलाकों में लंबे समय से चल रही नई जिला और तहसील की मांगें फिलहाल ठहर गई हैं, सांसदों, विधायकों और स्थानीय संगठनों द्वारा किए जा रहे आंदोलन और प्रस्ताव अब अस्थायी रूप से रुक गए हैं.
किन इलाकों में थी सबसे ज्यादा मांग
राज्य के कई क्षेत्रों में नए जिले और तहसील की मांग तेज थी,
• पिपरिया (नर्मदापुरम संभाग) को जिला बनाने की मांग
• बिना (बुंदेलखंड) को नया जिला बनाए जाने का प्रस्ताव
• सिहोरा (जबलपुर संभाग) को तहसील का दर्जा देने की मांग
• रीवा जिले में सीमा पुनर्गठन की प्रक्रिया
अब ये सभी प्रस्ताव जनगणना के चलते अधर में लटक गए हैं.
भोपाल की 8 नई तहसीलों पर भी रोक
राजधानी भोपाल में प्रशासनिक दबाव को कम करने के लिए 8 नई तहसील बनाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी थी, फाइलें अंतिम चरण में थीं, लेकिन सीमा फ्रीज के आदेश के बाद अब यह पूरा प्रस्ताव फाइलों तक ही सीमित रह गया है.
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पुनर्गठन आयोग की प्रक्रिया भी रुकी
राज्य प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग जिलों में सर्वे और बैठकें कर नई इकाइयों को लेकर सिफारिशें तैयार कर रहा था, लेकिन केंद्र के आदेश के बाद आयोग की प्रक्रिया पर भी अस्थायी रोक लग गई है.
फिर कब जगेगी उम्मीद
अधिकारियों के मुताबिक, नए जिले और तहसील के गठन पर विचार अब मार्च 2027 के बाद ही संभव होगा,
जनगणना का
• पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2026
• दूसरा चरण: फरवरी 2027 तक
पूरा होने के बाद ही प्रशासनिक बदलावों का रास्ता खुलेगा.
जनगणना के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी तय
राज्य गृह विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया है, जबकि संभाग स्तर पर यह जिम्मेदारी संभागायुक्तों को सौंपी गई है, इसका उद्देश्य जनगणना को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करना है.
कानून उल्लंघन पर सख्त सजा
सरकार ने चेतावनी दी है कि, जनगणना कार्य में बाधा डालना गंभीर अपराध है, जनगणना अधिनियम 1948 के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.
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Author: Vindhya Times
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