CG News : सुकमा में माओवादी हिंसा को बड़ा झटका, 26 इनामी हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

सुकमा में माओवादी हिंसा को बड़ा झटका, 26 इनामी हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

CG News : सुकमा में माओवादी हिंसा को बड़ा झटका, 26 इनामी हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

CG News : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से बुधवार को सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए एक बड़ी सफलता सामने आई है। जिले में सक्रिय 26 हार्डकोर माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों पर कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। खास बात यह है कि इनमें 7 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जो लंबे समय से संगठन के विभिन्न मोर्चों पर सक्रिय थीं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी माड़ डिविजन, पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) और सुकमा जिले के अलग-अलग अंदरूनी इलाकों में सक्रिय थे। ये माओवादी छत्तीसगढ़ और ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में कई गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। लंबे समय से ये सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए थे।

लगातार दबाव और विकास योजनाओं का असर

पिछले कुछ वर्षों से सुकमा और आसपास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही सरकार की ओर से विकास योजनाओं, पुनर्वास नीति और मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों ने माओवादी संगठन की पकड़ को कमजोर किया है। अधिकारियों का मानना है कि लगातार बढ़ते दबाव, जंगलों में घटते ठिकाने और संगठन के भीतर असंतोष के चलते इन माओवादियों ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि संगठन में अब पहले जैसी मजबूती नहीं रही है। कई इलाकों में स्थानीय लोगों का समर्थन भी कम हो गया है। साथ ही, लगातार चल रहे ऑपरेशनों के कारण उनका जीवन बेहद कठिन हो गया था।

Maoists lay down arms in Sukma

महिला माओवादियों की भी वापसी

इस आत्मसमर्पण में 7 महिला माओवादियों का शामिल होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है। महिला माओवादी संगठन के भीतर संदेशवाहक, हथियार संचालन, खुफिया जानकारी जुटाने और दस्ते के साथ जंगलों में रहने जैसी जिम्मेदारियां निभा रही थीं। अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं का आत्मसमर्पण करना यह दर्शाता है कि संगठन के भीतर मनोबल तेजी से गिर रहा है।

प्रशासन की पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ

सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने आत्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें आर्थिक सहायता, आवास, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।

एसपी चव्हाण ने कहा कि राज्य सरकार की नीति का उद्देश्य केवल हिंसा को समाप्त करना ही नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को नई दिशा देना भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की सुरक्षा और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

बचे हुए माओवादियों से सरेंडर की अपील

पुलिस अधीक्षक ने अभी भी जंगलों में सक्रिय माओवादियों से हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत और पुनर्वास के लिए हमेशा तैयार है। जो लोग समय रहते हथियार डालेंगे, उन्हें नीति के अनुसार पूरा लाभ मिलेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों के अभियान आगे भी जारी रहेंगे और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जो लोग मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे खुले हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शांति की उम्मीद

सुकमा जिले में यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इससे क्षेत्र में शांति और विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को तेजी से लागू करने का रास्ता साफ होगा।

स्थानीय ग्रामीणों में भी इस घटना को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि नक्सली हिंसा कम होती है तो इलाके में विकास कार्यों को गति मिलेगी और आम जनजीवन बेहतर होगा।

लगातार अपडेट जारी

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले से जुड़ी हर जानकारी पर नजर बनाए हुए हैं। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस खबर से जुड़े नए अपडेट लगातार सामने आ सकते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली और विकास की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाता है।

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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