CG News: रायपुर साहित्य उत्सव में भारत बोध पर मंथन, शिक्षा और मीडिया की भूमिका पर जोर
CG News: रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत रविवार को श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में “नवयुग में भारत बोध” विषय पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा आयोजित की गई, यह सत्र मावली प्रसाद श्रीवास्तव को समर्पित रहा, कार्यक्रम के सूत्रधार प्रभात मिश्रा थे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. संजीव शर्मा और डॉ. संजय द्विवेदी उपस्थित रहे.
शिक्षा में भारत बोध की आवश्यकता : डॉ. संजीव शर्मा
डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि, नई शिक्षा नीति में भारतीय दृष्टि को उचित स्थान दिया गया है, उन्होंने स्पष्ट किया कि, भारतीय संस्कृति केवल आत्मकल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व कल्याण की भावना से जुड़ी हुई है, शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को जाति-पाति और संकीर्ण मानसिकता से मुक्त कर मानवीय मूल्यों से जोड़ना होना चाहिए.
पाठ्यवस्तु में बदलाव जरूरी
डॉ. शर्मा ने कहा कि, प्राथमिक शिक्षा स्तर पर भारत बोध से जुड़ी पाठ्यवस्तु में परिवर्तन आवश्यक है, उन्होंने बताया कि, अंग्रेजों के काल में हुआ मानसिक आक्रमण भारतीयों में हीनभावना पैदा करने वाला था, जिससे बाहर निकलना आज की जरूरत है, उन्होंने जोर दिया कि, यह परिवर्तन पश्चिमी अनुकरण नहीं, बल्कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में होना चाहिए.
विश्वस्तरीय शिक्षा के साथ भारतीयकरण पर बल
उच्च शिक्षा पर चिंता जताते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि, संस्थानों को केवल मान्यता और रैंकिंग तक सीमित न रहकर विश्वस्तरीय शिक्षा के साथ उसका भारतीयकरण करना होगा, उन्होंने सुझाव दिया कि, पंचतंत्र जैसी कथाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए.
भारतीय भाषाओं में समाहित है ज्ञान-विज्ञान
डॉ. संजय द्विवेदी ने कहा कि, भारतीय भाषाओं में ज्ञान और विज्ञान दोनों का समृद्ध भंडार है, आज का भारतीय युवा अपनी परंपरा और ज्ञान को विश्व स्तर तक पहुंचा रहा है, भारत ने कभी अपने विचार थोपे नहीं, बल्कि श्रेष्ठ विचारों को प्रस्तुत किया है, जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने किया.
भारतीय संस्कृति में प्रकृति का देवत्व
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि, भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पर्वत और नदियों को देवता के रूप में देखा जाता है, उन्होंने रामराज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि, वहां राजतंत्र होते हुए भी अंतिम व्यक्ति की बात सुनी जाती थी, जो भारतीय लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है.
पत्रकारिता के भारतीयकरण की आवश्यकता
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि, भारतीय पत्रकारिता को भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालना समय की मांग है, पश्चिमी मानकों पर आधारित पत्रकारिता भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं से मेल नहीं खाती, उन्होंने कहा कि, भारत बोध का प्रसार सोशल मीडिया सहित सभी माध्यमों से होना चाहिए.
भारत बोध का मूल मंत्र
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि, भारत बोध का मूल सूत्र है, भारत को जानो, भारत को मानो, भारतीयता ही राष्ट्रभाव की सच्ची अभिव्यक्ति है, उन्होंने आत्मविश्वास की कमी को भारत बोध के मार्ग में बाधा बताते हुए कहा कि, इसे स्थायी बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है.
शिक्षा ही भारत बोध की मजबूत नींव
परिचर्चा में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि, शिक्षा के माध्यम से ही भारत बोध का सशक्त प्रसार संभव है, यही प्रक्रिया भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित करने और भावी पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का आधार बनेगी.
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Author: Vindhya Times
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