CG News: इंद्रावती टाइगर रिजर्व बना गिद्धों का सुरक्षित केंद्र, संरक्षण में मिली नई उड़ान
CG News: गिद्ध मृत पशुओं को खाकर बीमारियों के फैलाव को रोकते हैं, विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्धों की कमी से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इनके संरक्षण को अत्यंत प्राथमिकता दी जा रही है.
मजबूत हुआ संरक्षण अभियान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में “गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र” विकसित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य जहरीली दवाओं (NSAID), असुरक्षित शव निपटान और मानव हस्तक्षेप से गिद्धों को बचाना है.
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सैटेलाइट तकनीक से गिद्धों की निगरानी
छत्तीसगढ़ में पहली बार गिद्ध संरक्षण के लिए सैटेलाइट टेलीमेट्री निगरानी अपनाई गई है, इससे गिद्धों की गतिविधियों पर वैज्ञानिक तरीके से नजर रखी जा रही है और संरक्षण रणनीतियाँ सटीक बन रही हैं.
10 हजार वर्ग किलोमीटर में सक्रिय गिद्ध
गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं, ये घने जंगलों और मानव बस्तियों के बीच आवागमन करते हैं, जिससे उनके संरक्षण के लिए समन्वित रणनीति आवश्यक हो गई है.
वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन को दिशा मिली
वर्ष 2022 से 2025 के बीच सैटेलाइट ट्रैकिंग से 18,000 से अधिक GPS डेटा पॉइंट्स इकट्ठा किए गए, इससे वन्यजीव प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है और संरक्षण योजनाओं में मजबूती आई है.

“गिद्ध मित्र दल” की अहम भूमिका
क्षेत्रीय जीवविज्ञानी सूरज कुमार के नेतृत्व में गठित गिद्ध मित्र दल घोंसलों की निगरानी, सुरक्षित शव प्रबंधन और स्थानीय समुदाय को संरक्षण से जोड़ने का कार्य कर रहा है, इसी प्रयास से दुर्गम क्षेत्रों में पहली बार सुरक्षित प्रजनन संभव हुआ है.
“वुल्चर रेस्टोरेंट” की शुरुआत
संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए वुल्चर रेस्टोरेंट स्थापित किए गए हैं, यहां केवल NSAID-मुक्त शव गिद्धों को उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित भोजन मिलता है। ये केंद्र पर्यावरण शिक्षा का भी कार्य कर रहे हैं.
जागरूकता और शिक्षा का केंद्र
वुल्चर रेस्टोरेंट स्कूलों, युवाओं और ग्रामीणों के लिए पर्यावरण शिक्षा के केंद्र बने हैं, यहां गिद्धों की पारिस्थितिकी में भूमिका और संरक्षण के महत्व को समझाया जा रहा है.
भविष्य की बड़ी कार्ययोजना
तीसरे चरण में तीन और गिद्धों की सैटेलाइट टैगिंग, 50 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम, पंचायतों की भागीदारी से सौ किलोमीटर क्षेत्र में गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र और छत्तीसगढ़ की पहली गिद्ध पुनर्वास कार्ययोजना लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.
देश को मिला संरक्षण का नया मॉडल
तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता के समन्वय से इंद्रावती टाइगर रिजर्व यह साबित कर रहा है कि, प्रकृति और मानव एक साथ आगे बढ़ सकते हैं, गिद्ध संरक्षण की यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणादायक मॉडल बन गई है.
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Author: Vindhya Times
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