Mauganj News: मऊगंज में भ्रष्टाचार के खिलाफ बुजुर्गों का संघर्ष, गिरफ्तारी के बाद भी नहीं झुके आंदोलनकारी

Mauganj News: मऊगंज में भ्रष्टाचार के खिलाफ बुजुर्गों का संघर्ष, गिरफ्तारी के बाद भी नहीं झुके आंदोलनकारी

Mauganj News: मऊगंज में भ्रष्टाचार के खिलाफ बुजुर्गों का संघर्ष, गिरफ्तारी के बाद भी नहीं झुके आंदोलनकारी

Mauganj News: मध्यप्रदेश के मऊगंज में उस समय अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब 70 से 80 वर्ष की उम्र के बुजुर्ग भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतर आए, बुजुर्गों का आरोप है कि, शासकीय महाविद्यालय के लैब परिचालक पंकज श्रीवास्तव ने कलेक्टर का नाम लेकर एक महिला वार्डन से 1 लाख 12 हजार रुपये की रिश्वत ली.

प्रशासनिक कार्रवाई न होने से भड़का आक्रोश

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, रिश्वत की शिकायत के बावजूद प्रशासन ने लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, इसी प्रशासनिक चुप्पी के विरोध में बुजुर्गों ने “पंकज हटाओ, मऊगंज बचाओ” के नारों के साथ आंदोलन शुरू किया.

कड़ाके की ठंड में अर्धनग्न आंदोलन

कड़ाके की ठंड के बावजूद बुजुर्ग अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन करते नजर आए, उनका कहना था कि, यह प्रतीकात्मक विरोध है, जिससे शासन-प्रशासन का ध्यान भ्रष्टाचार की गंभीरता की ओर खींचा जा सके.

धारा 163 के तहत आंदोलन पर रोक

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने इलाके में धारा 163 लागू कर दी, इसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे बुजुर्गों को बलपूर्वक हिरासत में ले लिया गया.

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

हिरासत में लिए गए बुजुर्गों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, जब तक कथित रिश्वतखोर को हटाया नहीं जाता, उनका आंदोलन थमेगा नहीं, उन्होंने कहा कि, जरूरत पड़ी तो जेल के भीतर से भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहेंगे.

प्रशासन का बड़ा कदम

इसी बीच प्रशासन ने बड़ा निर्णय लेते हुए पंकज श्रीवास्तव को उनके मूल विभाग शासकीय शहीद केदारनाथ महाविद्यालय मऊगंज की ओर भारमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया, इसे आंदोलनकारियों की मांगों की आंशिक स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है.

आंदोलनकारियों की मांग मानी गई

प्रशासनिक आदेश के बाद यह स्पष्ट हुआ कि, बुजुर्गों के आंदोलन का असर पड़ा है और उनकी प्रमुख मांग स्वीकार की गई है, हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, केवल स्थानांतरण या भारमुक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई जरूरी है.

लोकतांत्रिक अधिकारों पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने मऊगंज में लोकतांत्रिक मूल्यों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के अधिकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बुजुर्गों पर धारा 163 का इस्तेमाल और बलपूर्वक गिरफ्तारी को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी गई.

प्रशासन की भूमिका पर बहस

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि, यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई की होती, तो बुजुर्गों को सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ती, अब पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका और निर्णयों पर सार्वजनिक बहस शुरू हो गई है.

भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतीक बना आंदोलन

मऊगंज का यह आंदोलन केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आम नागरिकों, खासकर बुजुर्गों की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक बन गया है, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि, प्रशासन आगे क्या ठोस कदम उठाता है और क्या दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होती है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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