MP News: मध्यप्रदेश में 2026 ‘कृषि वर्ष’ घोषित, किसानों की आय बढ़ाने का 3 साल का रोडमैप तैयार
MP News: मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाने का ऐलान किया है, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि, इसका उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और प्रदेश की कृषि को वैश्विक बाजार से जोड़ना है.
तीन साल की रणनीति, एकजुट विभाग
मुख्यमंत्री निवास में हुई समीक्षा बैठक में तय किया गया कि, कृषि से जुड़े सभी विभाग कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य और ऊर्जा आपसी समन्वय से काम करेंगे, सभी योजनाएं तीन साल के लक्ष्य के साथ लागू की जाएंगी.

किसानों को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय ट्रेनिंग
किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य और संभाग स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक्सपोजर विजिट आयोजित होंगी, सरकार किसानों को देश के उन्नत कृषि राज्यों के साथ-साथ इजराइल और ब्राजील जैसे देशों में आधुनिक खेती, पशुपालन और तकनीकी नवाचार देखने भेजेगी.
खेती को बाजार और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाएगा
सरकार का फोकस खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और निर्यात से जोड़ने का है, इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और आय में सीधा इजाफा होगा.

मशीन, तकनीक और सिंचाई पर विशेष जोर
खेती की लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा, माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को प्रोत्साहित कर जल संरक्षण के साथ अधिक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, डिजिटल एग्रीकल्चर और एग्री स्टैक को भी जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा.
FPO और सहकारिता से किसानों को मजबूती
छोटे किसानों को संगठित करने के लिए किसान उत्पादक संगठन (FPO) को मजबूत किया जाएगा, इन्हें खेती के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और मार्केटिंग से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों की सामूहिक ताकत बढ़ेगी.
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सस्ता कर्ज और बेहतर बाजार व्यवस्था
सरकार कम ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है, साथ ही मजबूत बाजार नेटवर्क तैयार किया जाएगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल सके.
प्रोसेसिंग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
खाद्य प्रसंस्करण यूनिट, उद्यानिकी विस्तार और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाएगा, इससे किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा
जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और श्रीअन्न (मिलेट्स) उत्पादन पर विशेष फोकस रहेगा, पारंपरिक कृषि ज्ञान और जैव विविधता के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
फूल, दूध, मछली और पशुपालन से अतिरिक्त आय
खेती के साथ फूलों की खेती, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मछली पालन को आय के वैकल्पिक साधन के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा, “सांची है तो शुद्ध है” जैसे अभियानों से दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी.
मंडी से e-NAM तक पारदर्शी सिस्टम
किसानों को बेहतर और पारदर्शी दाम दिलाने के लिए मंडियों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, e-NAM से जुड़ी मंडियों में ग्रेडिंग और पैकेजिंग की सुविधा होगी, जिससे प्रदेश के कृषि उत्पादों की राष्ट्रीय बाजारों में पकड़ मजबूत होगी.
समन्वय से बनेगा समृद्ध प्रदेश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि, सभी विभाग एक टीम की तरह काम करेंगे, समन्वित प्रयासों से ही “समृद्ध किसान – समृद्ध मध्यप्रदेश” के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा.
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Author: Vindhya Times
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