MP News: ब्यारमा नदी किनारे बसा ऐतिहासिक गांव, खंडहरों में छुपी 500 वर्ष पुरानी शिव भक्ति, सभ्यता और रहस्य

MP News: ब्यारमा नदी किनारे बसा ऐतिहासिक गांव, खंडहरों में छुपी 500 वर्ष पुरानी शिव भक्ति, सभ्यता और रहस्य

MP News: ब्यारमा नदी किनारे बसा ऐतिहासिक गांव, खंडहरों में छुपी 500 वर्ष पुरानी शिव भक्ति, सभ्यता और रहस्य

MP News: मध्यप्रदेश के दमोह जिले में ब्यारमा नदी के तट पर स्थित जुझार गांव अपनी प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है, स्थानीय लोग इसे “बूढ़ा जुझार” के नाम से जानते हैं, यह गांव कभी समृद्ध बसाहट, धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक जीवन का केंद्र रहा, जिसकी स्मृतियां आज भी खेतों, खंडहरों और लोककथाओं में जीवित हैं.

500 वर्ष पुराना शिव मंदिर बना पहचान

बूढ़ा जुझार की सबसे बड़ी पहचान यहां स्थित लगभग 500 साल पुराना शिव मंदिर है, चूने-पत्थर से निर्मित यह मंदिर प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है, मंदिर में कभी गर्भगृह में शिव पिंडी और जलहरी स्थापित थीं तथा इसके चार विशाल द्वार धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के साक्षी रहे हैं.

900 शंख और 8,900 झालरों की गूंज

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, एक समय ऐसा था, जब मंदिर की आरती के दौरान 900 शंख और 8,900 झालरों की एक साथ ध्वनि पूरे क्षेत्र में गूंज उठती थी, यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक हुआ करता था.

बाढ़ ने उजाड़ा समृद्ध गांव

बूढ़ा जुझार कभी अत्यंत समृद्ध और घनी आबादी वाला गांव था, लेकिन ब्यारमा नदी में बार-बार आई बाढ़ ने गांव की बसाहट को नष्ट कर दिया, मजबूर होकर ग्रामीणों ने नया जुझार बसाया और पुराना गांव खेतों और खंडहरों में सिमटकर रह गया, आज भी खेती के दौरान मूर्तियां, सिलबट्टे और प्राचीन अवशेष मिलते हैं.

बस्तियों के नाम सुनाते हैं इतिहास

कुम्हारखेड़ा, नाचनारीखेड़ा, फूटी खेर, गढ़िया और भरका जैसे बस्तियों के नाम बताते हैं कि, कभी किस समुदाय की बसाहट कहां थी, ये नाम बूढ़ा जुझार की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विविधता की कहानी कहते हैं, स्थानीय निवासी इमरत सिंह और अन्य ग्रामीणों के अनुसार, शिव पिंडी और जलहरी की चोरी के बाद मंदिर वीरान हो गया, वर्तमान में यह ऐतिहासिक धरोहर असुरक्षित अवस्था में है, ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर के सर्वेक्षण और संरक्षण की मांग की है.

किन्नरों से जुड़ी रहस्यमयी मान्यता

बूढ़ा जुझार की एक अनोखी परंपरा किन्नरों से जुड़ी है, मान्यता है कि, यदि कोई किन्नर गांव की सीमा में प्रवेश कर ले, तो वह बेहोश हो जाता है, ग्रामीण इसे देवी परंपरा और गांव की आध्यात्मिक शक्ति से जोड़कर देखते हैं, यह रहस्य आज भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है.

स्थापत्य कला आज भी करती है आकर्षित

खंडहर बन चुका यह शिव मंदिर आज भी अपनी नक्काशीदार दीवारों और मजबूत निर्माण शैली से लोगों को आकर्षित करता है, मंदिर के चार विशाल द्वार इस बात के प्रमाण हैं कि, यह स्थल कभी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा होगा.

संरक्षण की मांग, पुनर्जीवन की उम्मीद

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि, बूढ़ा जुझार केवल एक गांव नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक है, यदि मंदिर और अन्य अवशेषों का संरक्षण किया जाए, तो यह स्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास, आस्था और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बन सकता है.

आस्था, इतिहास और विरासत का संगम

बूढ़ा जुझार और इसका 500 वर्ष पुराना शिव मंदिर हमें यह संदेश देता है कि, आस्था और इतिहास की रक्षा आवश्यक है, खंडहरों में छिपी यह विरासत आज भी जीवित है और संरक्षण के माध्यम से इसे फिर से गौरवशाली बनाया जा सकता है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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