MP News: चैत्र नवरात्रि 2026: मध्य प्रदेश के 5 प्रसिद्ध देवी मंदिर, जहां दर्शन से मिलेगी विशेष कृपा

MP News: चैत्र नवरात्रि 2026: मध्य प्रदेश के 5 प्रसिद्ध देवी मंदिर, जहां दर्शन से मिलेगी विशेष कृपा

MP News: चैत्र नवरात्रि 2026: मध्य प्रदेश के 5 प्रसिद्ध देवी मंदिर, जहां दर्शन से मिलेगी विशेष कृपा

MP News: 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, इस दौरान पूरे मध्य प्रदेश में धार्मिक उत्साह चरम पर रहता है और भक्त बड़ी संख्या में देवी मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में दर्शन करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, यह समय भक्ति, साधना और आत्मशक्ति को जागृत करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है.

माँ शारदा मंदिर मैहर

मैहर में स्थित माँ शारदा मंदिर देश के प्रमुख शक्ति स्थलों में गिना जाता है, त्रिकुट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर श्रद्धा और भक्ति का केंद्र है, जहां हजारों भक्त देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, माँ शारदा को देवी सरस्वती का स्वरूप माना जाता है, जो ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी हैं, यही कारण है कि, विद्यार्थी और साधक विशेष रूप से यहां आशीर्वाद लेने आते हैं.

MP Maihar Maa Sharda Mandir Story; History Facts & Beliefs, Significance |  Navratri

शक्ति पीठ से जुड़ी मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह स्थान उन पवित्र स्थलों में शामिल है जहां माता सती के अंग गिरे थे, माना जाता है कि, यहां देवी का आभूषण (हार) गिरा था, जिससे यह स्थान शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया.

आल्हा-उदल की अमर कथा

लोक मान्यताओं के अनुसार, वीर आल्हा और उदल सबसे पहले इस स्थान पर पहुंचे थे, उन्होंने घने जंगलों के बीच इस मंदिर की खोज की और मां शारदा की कठोर तपस्या की, कहा जाता है कि, उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें विशेष आशीर्वाद प्रदान किया.

आज भी जीवित है परंपरा

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि, आल्हा आज भी ब्रह्म मुहूर्त में यहां आकर देवी की पूजा करते हैं, यह विश्वास इस मंदिर को और भी रहस्यमयी और दिव्य बनाता है, मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो उनकी आस्था और समर्पण की परीक्षा भी मानी जाती है, माँ शारदा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि विश्वास, शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा केंद्र है, जहां हर भक्त को आंतरिक शांति और नई ऊर्जा का अनुभव होता है.

विजयासन माता मंदिर

सीहोर जिले के सलकनपुर में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर देवी दुर्गा के विंध्यवासिनी विजयासन रूप को समर्पित है, यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है, यह मंदिर लगभग 800 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 1400 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो उनकी श्रद्धा और विश्वास की परीक्षा भी मानी जाती है.

बिजासन माता मंदिर, सलकनपुर - विकिपीडिया

सिद्धपीठ की मान्यता

विजयासन (बीजासन) माता मंदिर को एक सिद्धपीठ के रूप में जाना जाता है, मान्यता है कि, यहां सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा जरूर पूरी होती है, इसलिए दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं, यह पवित्र स्थल भोपाल से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे यहां पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए आसान भी है.

नवरात्रि में उमड़ता सैलाब

नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है, भक्त मां के दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, सलकनपुर का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, तप और विश्वास का प्रतीक है, जहां हर भक्त मां की कृपा पाने की कामना लेकर आता है, दतिया का यह प्रसिद्ध मंदिर देवी बगलामुखी को समर्पित है, यह स्थान तंत्र साधना और आध्यात्मिक शक्ति के लिए बेहद प्रसिद्ध माना जाता है.

पीताम्बरा पीठ

दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ देश के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, यह स्थान अपनी जागृत शक्ति और दिव्य ऊर्जा के लिए जाना जाता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, इस पवित्र धाम की स्थापना वर्ष 1935 में संत स्वामीजी महाराज द्वारा की गई थी, तभी से यह स्थान तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया, यहां देवी माँ बगलामुखी की पूजा होती है, जो दस महाविद्याओं में से एक मानी जाती हैं, उन्हें पीले रंग से विशेष लगाव है, इसलिए यहां पूजा में पीले वस्त्र और प्रसाद का विशेष महत्व है.

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राजसत्ता और विजय की देवी

मान्यता है कि, मां बगलामुखी शत्रुओं के नाश और विजय दिलाने वाली देवी हैं, कई लोग सफलता, न्याय और शक्ति प्राप्ति के लिए यहां विशेष अनुष्ठान करवाते हैं, स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती हैं, यही कारण है कि, यह स्थान तंत्र साधकों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है, मंदिर परिसर में वनखंडेश्वर महादेव मंदिर भी स्थित है, जिसे महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है, इसके अलावा यहां धूमावती देवी का मंदिर भी श्रद्धा का केंद्र है, यहां का वातावरण अत्यंत शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है, भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना यहां जरूर पूरी होती है.

बीजासन माता मंदिर

इंदौर में स्थित बिजासन माता मंदिर का इतिहास एक हजार साल से भी अधिक पुराना माना जाता है, यह मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है, इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1760 में महाराजा शिवाजीराव होलकर द्वारा तैयार कराया गया था, मराठा शैली में निर्मित यह मंदिर आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान को संजोए हुए है.

1000 साल पुराना है बिजासन माता मंदिर का इतिहास.....पढ़ें मंदिर के बारे में

नौ रूपों में विराजती माता

यहां देवी के नौ स्वरूप स्थापित हैं, जो शक्ति और सिद्धि का प्रतीक माने जाते हैं, प्राचीन समय में यह स्थान तंत्र-मंत्र और साधना के लिए भी प्रसिद्ध रहा है, बिजासन माता को सौभाग्य और पुत्र प्राप्ति की देवी माना जाता है, यही कारण है कि, नवविवाहित जोड़े यहां विशेष रूप से दर्शन और पूजा के लिए आते हैं.

आल्हा-उदल की कथा से जुड़ाव

लोक मान्यताओं के अनुसार, आल्हा और उदल ने भी युद्ध में विजय पाने के लिए यहां माता से आशीर्वाद मांगा था, चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं, इस दौरान मंदिर परिसर भक्ति और उत्सव से भर जाता है, यह मंदिर इंदौर शहर के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है और रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है, बिजासन माता मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह श्रद्धा, परंपरा और चमत्कारिक विश्वास का ऐसा केंद्र है, जहां हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर आता है.

हरसिद्धि मंदिर

उज्जैन में स्थित हरसिद्धि मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, यह पवित्र स्थल महाकालेश्वर मंदिर के पास रामघाट क्षेत्र में स्थित है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां माता सती की कोहनी गिरी थी, इसी कारण यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है.

सिर्फ महाकाल ही नहीं, उज्जैन का यह शक्तिपीठ भी है खास, इस वजह से मिला  हरसिद्धि का नाम - Harsiddhi Temple Ujjain The Shaktipeeth As Special As  Mahakal know its history and

सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी

कहा जाता है कि, सम्राट विक्रमादित्य मां हरसिद्धि के परम भक्त थे और उन्होंने यहां विशेष पूजा-अर्चना की थी, जिससे इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है, मंदिर की संरचना मराठा काल की वास्तुकला को दर्शाती है, जो इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद खास बनाती है, यहां स्थित दो विशाल दीप स्तंभ इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान हैं, नवरात्रि के दौरान इन स्तंभों पर सैकड़ों दीप जलाए जाते हैं, जो अद्भुत और दिव्य दृश्य प्रस्तुत करते हैं.

मां अन्नपूर्णा के रूप में पूजा

यहां मां हरसिद्धि को सिंदूरी रूप में स्थापित किया गया है और उन्हें अन्नपूर्णा स्वरूप में भी पूजा जाता है, जिससे भक्तों को समृद्धि और सुख का आशीर्वाद मिलता है, यह मंदिर उज्जैन शहर में स्थित है, जहां रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है, निकटतम हवाई अड्डा इंदौर में है, हरसिद्धि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का ऐसा केंद्र है, जहां हर भक्त को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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