MP News: MP में बिजली कंपनियों का लगातार घाटा उपभोक्ताओं पर हर बार बढ़ते दामों का बोझ
MP News: मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों में स्थिति अभी भी चिंता जनक है। तकनीकी कारणों, लाइन लॉस और बड़े बकायादारों से वसूली न होने के चलते कंपनियां लंबे समय से घाटे में चल रही हैं। इसका नतीजा यह है कि हर बार उपभोक्ताओं को बिजली के दाम बढ़ाने के रूप में इसका बोझ उठाना पड़ता है। इस बार भी कंपनियों के प्रबंधन ने लगभग पौने दो करोड़ उपभोक्ताओं के सामने यही स्थिति पेश की है।
9 साल के आंकड़े और कुल घाटा
विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में मध्य, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र बिजली कंपनियों ने 9 साल के आय-व्यय का ब्योरा पेश किया। आंकड़ों के अनुसार, पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी का कुल घाटा 16,188.48 करोड़ रुपए, मध्य क्षेत्र वितरण कंपनी का 14,605.88 करोड़ रुपए और पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनी का 3,767 करोड़ रुपए रहा। इन तीनों कंपनियों ने मिलाकर 9 वर्षों में 34,561 करोड़ रुपए का घाटा दर्ज किया।
घाटा दिखाकर दर बढ़ाने की तैयारी
चिंताजनक बात यह है कि घाटे को कम करने के लिए कंपनियों ने 4,000 करोड़ से अधिक राशि खर्च की, फिर भी पूर्व और मध्य क्षेत्र वितरण कंपनियां लगातार घाटे में हैं। पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी का घाटा 2018-19 में 2,896 करोड़ रुपए था, 2022-23 में 2,451 करोड़ और 2024-25 में 1,047 करोड़ रुपए रह गया। इसी तरह, मध्य क्षेत्र वितरण कंपनी का घाटा 2018-19 में 3,837 करोड़ रुपए था और 2024-25 में 1,570 करोड़ रुपए दिखाया गया।
लगातार घाटे में पूर्व और मध्य क्षेत्र
इन तीनों कंपनियों में केवल पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनी ने बीच के वर्षों में 2,440 करोड़ रुपए का लाभ दिखाया है। कंपनियों ने मप्र विद्युत नियामक आयोग को घाटा दर्शाकर बिजली दर बढ़ाने की सिफारिशें भेजी हैं। आयोग ने प्रस्ताव का परीक्षण लगभग पूरा कर लिया है। यदि ये सिफारिशें मान ली गईं, तो 1 अप्रैल के बाद कभी भी बिजली के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका असर पौने दो करोड़ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। यह तब है जबकि कंपनियों को घाटा कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में 4,000 करोड़ से अधिक की राशि दी जा चुकी है।
पश्चिम क्षेत्र कंपनी का उदाहरण
पश्चिम क्षेत्र वितरण कंपनी इस मामले में उदाहरण पेश करती है। इस कंपनी ने स्मार्ट मीटर, नई तकनीक, बिल वसूली सुधार, फीडर सेपरेशन और डिजिटल मॉनीटरिंग जैसी पहलों से नुकसान कम करने में सफलता पाई। 2021 से 2024 तक कंपनी का घाटा क्रमशः 1,790, 1,130 और 125 करोड़ रहा, लेकिन 2024-25 में इसे 730 करोड़ रुपए का लाभ हुआ। सवाल यह उठता है कि मध्य और पूर्व क्षेत्र की कंपनियां पश्चिम क्षेत्र के इस मॉडल को क्यों नहीं अपना रही हैं।
यह भी पढ़ें: Sidhi News: सीधी के संजय टाइगर रिजर्व में नर बाघ T-67 ने शावक का शिकार
Author: Vindhya Times
विन्ध्या टाइम्स वेब बेस्ड न्यूज़ चैनल है जो विन्ध्य क्षेत्र में एक सार्थक,सकारात्मक और प्रभावी रिसर्च बेस्ड पत्रकारिता के लिए अपनी जाना जाता है.चैनल के माध्यम से न्यूज़ बुलेटिन, न्यूज़ स्टोरी, डाक्यूमेंट्री फिल्म के साथ-साथ विन्ध्य क्षेत्र और मप्र. की ख़बरों को प्रसारित किया जाता है. विन्ध्य क्षेत्र की राजनीति, युवा, सांस्कृतिक, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कल्चर, फ़ूड, और अन्य क्षेत्र में एक मजबूत पत्रकारिता चैनल का उद्देश्य है. विन्ध्या टाइम्स न्यूज़ चैनल की ख़बरों को आप चैनल की वेबसाइट-www.vindhyatimes.in एवं एंड्राइड बेस्ड एप्लीकेशन के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही साथ फेसबुक पेज- https://www.facebook.com/vindhyatimesnews और ट्वीटर में -@vindhyatimes से भी आप ख़बरों को पढ़ सकते हैं. जुड़े रहिये हमारे साथ |









