MP News: राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने दिया भावुक भाषण कबीर और अटल जी के विचारों के साथ समापन

MP News: राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने दिया भावुक भाषण कबीर और अटल जी के विचारों के साथ समापन

MP News: राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने दिया भावुक भाषण कबीर और अटल जी के विचारों के साथ समापन

MP News: अगले तीन महीनों में राज्यसभा से रिटायर होने वाले 59 सांसदों को सदन में विदाई दी गई। इस अवसर पर मध्यप्रदेश से कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने भी अपना विदाई भाषण दिया। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, विचारधारा और लोकतंत्र के महत्व पर विचार व्यक्त किए। भाषण के दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और संत कबीरदास के विचारों का उल्लेख किया। उनका संबोधन करीब पांच मिनट का रहा और अंत में उन्होंने सदन के प्रति आभार जताया।

राज्यसभा में सांसदों को दी गई विदाई

राज्यसभा में अगले तीन महीनों के दौरान सेवानिवृत्त होने वाले 59 सांसदों के सम्मान में विदाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सभी सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। मध्यप्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने भी सदन को संबोधित किया। उन्होंने अपने संसदीय कार्यकाल और अनुभवों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सदन के अन्य सदस्यों ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। यह अवसर भावनात्मक और गरिमामय रहा।

अटल जी की पंक्तियों का उल्लेख

अपने भाषण में दिग्विजय सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अटल जी की यह पंक्ति याद आती है—“मैं न टायर्ड हूं, न रिटायर्ड हूं।” उन्होंने बताया कि राजनीति में उन्होंने अपना मार्ग स्वयं तय किया है। दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें विभिन्न सदनों में सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आगे भी समाज और देश के लिए कार्य करते रहेंगे। सदन में उपस्थित सदस्यों के प्रति उन्होंने आभार प्रकट किया

कबीरदास जी की पंक्तियों के साथ समापन

अपने विदाई भाषण के अंत में दिग्विजय सिंह ने संत कबीरदास जी की प्रसिद्ध पंक्तियां दोहराईं। उन्होंने कहा कि वे अपने राजनीतिक जीवन में कबीर के विचारों का पालन करते आए हैं। उन्होंने “न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर” का उल्लेख करते हुए निष्पक्षता और संतुलन की बात कही। अपने संबोधन में उन्होंने सभी के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने यह भी कहा कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। उनका भाषण लगभग पांच मिनट तक चला।

 राजनीतिक सफर और अनुभव

दिग्विजय सिंह ने अपने जीवन की शुरुआत का उल्लेख करते हुए बताया कि 22 वर्ष की आयु में वे नगर पालिका अध्यक्ष बने। इसके बाद 30 वर्ष की उम्र में विधायक और 33 वर्ष की आयु में मंत्री तथा सांसद बने। 46 वर्ष की उम्र में वे मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि पूरे जीवन में वे अपनी विचारधारा पर अडिग रहे और कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी के प्रति कटुता नहीं रखी। यदि उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची हो तो उन्होंने क्षमा भी मांगी।

लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द पर विचार

दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद चर्चा और संवाद है। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बिलों पर विचार-विमर्श के बाद सहमति बननी चाहिए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वे सदन में अव्यवस्था के पक्ष में कभी नहीं रहे। देश में बढ़ती साम्प्रदायिक कटुता और मनमुटाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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