MP News: मध्यप्रदेश में खाद्य मिलावट बना बड़ा खतरा दूध से मसालों तक रोजमर्रा की चीजें असुरक्षित
MP News: मध्यप्रदेश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट अब गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की रिपोर्ट में 2000 से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले ग्वालियर से सामने आए। दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह मिलावट केवल फूड पॉइजनिंग ही नहीं, बल्कि डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल समस्याओं का कारण भी बन रही है।
FDA रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश में खाद्य मिलावट बड़े पैमाने पर फैली हुई है। मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल और उनके टेस्ट के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में बीते तीन वर्षों के आंकड़े शामिल किए गए हैं। पहली बार एक लाख से ज्यादा सैंपलों की समग्र रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें 2000 से अधिक सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह स्थिति बताती है कि बाजार में बिकने वाली कई खाद्य वस्तुएं सुरक्षित नहीं हैं। लगातार निगरानी के बावजूद मिलावट का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है, जो प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

आम लोगों की सेहत पर सीधा असर
मिलावटी भोजन का असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। 23 वर्षीय राहुल शर्मा का मामला इसका उदाहरण है, जिन्होंने बाहर का खाना खाने के बाद गंभीर फूड पॉइजनिंग का सामना किया। तेज पेट दर्द और दस्त के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और चार दिन इलाज चला। वहीं 29 वर्षीय सात्विक पंडित की जांच में विटामिन की कमी, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के शुरुआती लक्षण सामने आए। डॉक्टरों ने उन्हें हार्ट डिजीज के जोखिम में बताया। इन मामलों से स्पष्ट है कि मिलावटी भोजन केवल तात्कालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा कर रहा है।
कई जिलों में फैला मिलावट का जाल
राज्य के कई जिलों में मिलावट के मामले सामने आए हैं, जिनमें ग्वालियर सबसे आगे है जहां करीब 420 सैंपल फेल पाए गए। इसके बाद गुना, उज्जैन, भिंड और बुरहानपुर जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नमूने असफल रहे। इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर सहित 30 से अधिक जिलों में मिलावट का असर देखा गया है। जांच में दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। यह दर्शाता है कि मिलावट किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में फैली समस्या बन चुकी है।

शरीर पर मिलावट के खतरनाक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी भोजन में मौजूद हानिकारक तत्व शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाते हैं। एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि ऐसे भोजन में एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स, माइक्रोप्लास्टिक और हेवी मेटल्स पाए जाते हैं। ये शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करते हैं और गट हेल्थ को खराब कर देते हैं। इससे शरीर में पोषण की कमी हो जाती है और अच्छे बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। लंबे समय में यह मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियों को बढ़ावा देता है, जो आज के युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं।
मसाले, तेल और मिठाइयां भी खतरे में
मिलावट सिर्फ डेयरी उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि मसाले और खाद्य तेल भी इससे प्रभावित हैं। लाल मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर और सोयाबीन तेल के कई सैंपल फेल पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनका नियमित सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है। इसके अलावा जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसे खाद्य पदार्थों में भी मिलावट पाई गई है। त्योहारों के समय यह खतरा और बढ़ जाता है, खासकर दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में मिठाइयों के सैंपल बड़ी संख्या में असफल रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और निगरानी
FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव के अनुसार फेल पाए गए सैंपलों के आधार पर संबंधित दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। जुर्माना और कानूनी प्रक्रिया लगातार जारी है। साथ ही निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। मोबाइल वैन के जरिए प्रदेशभर में सैंपल इकट्ठा कर उनकी जांच की जा रही है। सरकार मिलावट के इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही है, ताकि लोगों को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकें।
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Author: Vindhya Times
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