MP News: एमपी में सैकड़ों अतिथि शिक्षकों की नौकरी संकट में, नया आदेश जारी
MP News: मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश के कारण प्रदेश के लगभग एक लाख दिव्यांग बच्चों के नए सत्र की पढ़ाई खतरे में पड़ गई है। 500 दिव्यांग अतिथि शिक्षकों की नौकरी एक माह पहले ही खत्म हो गई है, जिससे अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए सत्र में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे।
दिव्यांग अतिथि शिक्षकों की तैनाती पर असर
एमपी स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार राजधानी के आठ स्कूलों में दिव्यांग अतिथि शिक्षक तैनात थे, जिनकी जिम्मेदारी लगभग तीन हजार बच्चों को पढ़ाने की थी। पूरे प्रदेश में इनकी तैनाती पांच सौ स्कूलों में थी। ये शिक्षक कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए अस्थाई रूप से रखे गए थे। आदेश के कारण उनके रोजगार की अवधि एक माह पहले ही समाप्त कर दी गई है। नियमानुसार, नए सत्र में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती है।
सरकार से मंजूरी में देरी का कारण
समग्र शिक्षा अभियान के तहत बजट भी केंद्र से ही मिलता है। इस बार केंद्र सरकार से समय पर अनुमति नहीं मिलने के कारण शिक्षकों की नौकरी समय से पहले खत्म कर दी गई। राजधानी में तैनात दिव्यांग शिक्षक सुनील सालगवकर ने बताया कि इस आदेश से कई शिक्षकों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी।नया शिक्षण सत्र 2026-27 1 अप्रैल 2026 से शुरू होना है। इस दौरान बच्चों के एडमिशन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

समग्र शिक्षा अभियान के तहत जारी आदेश
लेकिन अतिथि शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण दिव्यांग बच्चों को नए सत्र की शुरुआत में ही पढ़ाई में बाधा का सामना करना पड़ेगा। इसका असर पूरे सत्र की शिक्षा गुणवत्ता पर पड़ सकता है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया है कि भारत सरकार से निर्देश न मिलने के कारण अतिथि शिक्षकों की नौकरी 30 अप्रैल तक नहीं, बल्कि एक माह पहले ही समाप्त की जा रही है। अपर परियोजना समन्वयक नंदा भलावे कुशरे के अनुसार यह आदेश केंद्र से अनुमति में देरी के कारण लागू किया गया।
राज्य सरकार के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
स्थिति गंभीर इसलिए है क्योंकि राज्य सरकार के पास इस अस्थायी व्यवस्था का कोई वैकल्पिक उपाय नहीं है। अतिथि शिक्षकों पर अत्यधिक निर्भरता ने समस्या को और जटिल बना दिया है। नए सत्र की शुरुआत से पहले योजना का क्रियान्वयन न हो पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई में व्यवधान आ सकता है।
बच्चों और शिक्षकों पर पड़ेगा असर
500 अतिथि शिक्षकों की अनुपस्थिति से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के एक लाख दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। बच्चों को पढ़ाने के लिए न तो राज्य सरकार के पास तत्काल विकल्प हैं और न ही नए शिक्षकों की नियुक्ति समय पर हो पाएगी। शिक्षकों के लिए यह स्थिति रोजगार के नुकसान और असमय नौकरी खत्म होने का कारण बनेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत ऐसी स्थिति से बचने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
समस्या की मूल वजह अस्थायी नियुक्ति
समय पर अनुमति मिलने और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के अभाव में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा बाधित होने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि अस्थायी नियुक्तियों पर अधिक निर्भरता ही इस समस्या की मुख्य वजह है। यदि शिक्षकों को स्थायी या लंबी अवधि के लिए रखा जाता, तो सत्र शुरू होने के समय इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इस वजह से दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और उनके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अपील और समाधान की आवश्यकता
शिक्षकों और अभिभावकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आवश्यक है कि केंद्र सरकार से अनुमति जल्द ली जाए और अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति को सत्र शुरू होने से पहले ही सुनिश्चित किया जाए। अन्यथा प्रदेश के दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और नई शिक्षा योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
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Author: Vindhya Times
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