MP News: भोपाल युवा विधायक सम्मेलन में शिक्षा, युवाओं की चुनौतियां और फ्रीबीज पर खुलकर बोले जनप्रतिनिधि

MP News: भोपाल युवा विधायक सम्मेलन में शिक्षा, युवाओं की चुनौतियां और फ्रीबीज पर खुलकर बोले जनप्रतिनिधि

MP News: भोपाल युवा विधायक सम्मेलन में शिक्षा, युवाओं की चुनौतियां और फ्रीबीज पर खुलकर बोले जनप्रतिनिधि

MP News: भोपाल में आयोजित दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 50 से अधिक युवा विधायकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान दैनिक भास्कर ने युवाओं से जुड़े अहम मुद्दों पर उनकी राय जानी। शिक्षा, बेरोजगारी, छात्र संघ चुनाव और फ्रीबीज योजनाओं जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। राजस्थान के शिव से निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने विशेष रूप से शिक्षा व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

युवाओं के लिए सोच और वर्तमान चुनौतियां

सम्मेलन के दौरान विधायकों से पूछा गया कि जब वे विधायक नहीं थे, तब युवाओं के लिए उनकी क्या सोच थी और आज के समय में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या क्या है। कई विधायकों ने माना कि पहले वे युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की बात सोचते थे। लेकिन वर्तमान में बेरोजगारी, स्किल डेवलपमेंट की कमी और शिक्षा की गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौतियां बनकर सामने आई हैं। युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि रोजगार के लिए जरूरी कौशल देने पर भी जोर दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि नीतियों का असर जमीन पर दिखना चाहिए, सिर्फ घोषणाओं से बदलाव संभव नहीं है।

फ्रीबीज योजनाओं पर अलग-अलग राय

लाड़ली बहना जैसी योजनाओं पर विधायकों की राय अलग-अलग रही। कुछ विधायकों ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ऐसी योजनाएं जरूरी हैं, जबकि अन्य ने इसे लंबे समय में अर्थव्यवस्था पर बोझ बताया। चर्चा में यह भी सामने आया कि यदि योजनाएं स्थायी विकास से जुड़ी हों, जैसे रोजगार या स्वरोजगार के अवसर देना, तो उनका असर ज्यादा सकारात्मक होगा। कई विधायकों ने सुझाव दिया कि फ्रीबीज के बजाय स्किल और रोजगार आधारित योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि लाभार्थी आत्मनिर्भर बन सकें।

छात्र संघ चुनाव पर बहस

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में छात्र संघ चुनाव दोबारा शुरू करने को लेकर भी चर्चा हुई। कुछ विधायकों का मानना था कि छात्र राजनीति से नेतृत्व क्षमता विकसित होती है और युवाओं को लोकतंत्र की समझ मिलती है। वहीं कुछ ने कहा कि इससे शिक्षण संस्थानों का माहौल बिगड़ सकता है। इसके बावजूद अधिकतर युवा विधायकों ने यह माना कि सही नियमों और पारदर्शिता के साथ छात्र संघ चुनाव कराए जा सकते हैं। इससे युवाओं को अपनी आवाज उठाने का मंच मिलेगा और भविष्य के नेतृत्व का निर्माण होगा।

शिक्षा व्यवस्था पर रविन्द्र भाटी का जोर

राजस्थान के शिव से निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने शिक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश को 2047 तक विकसित बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है जब जनप्रतिनिधि खुद शिक्षित और जागरूक हों। उन्होंने यह भी कहा कि आज कई जनप्रतिनिधि केवल औपचारिक भूमिका निभा रहे हैं, जबकि उन्हें सक्रिय रूप से नीतियों और बहस में भाग लेना चाहिए। भाटी ने सवाल उठाया कि हर बजट में शिक्षा के लिए करोड़ों रुपए घोषित होते हैं, लेकिन उसका वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है, यह देखने की जरूरत है।

जनप्रतिनिधियों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल का प्रस्ताव

भाटी ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों, अफसरों और सांसदों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता अपने आप सुधरेगी, क्योंकि जब प्रभावशाली वर्ग के बच्चे वहां पढ़ेंगे तो व्यवस्थाओं पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह मांग केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी उठाई जानी चाहिए। इससे शिक्षा में समानता आएगी और गरीब व अमीर के बीच की खाई कम होगी।

स्कूलों की निगरानी में जनप्रतिनिधियों की भूमिका

रविन्द्र सिंह भाटी ने यह भी सवाल उठाया कि कितने विधायक अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का नियमित निरीक्षण करते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत कम जनप्रतिनिधि यह देखने जाते हैं कि शिक्षक समय पर आते हैं या नहीं और पढ़ाई सही तरीके से हो रही है या नहीं। उनके अनुसार, यदि विधायक खुद इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लें, तो शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार आ सकता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे सिर्फ नीतियां बनाने तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाएं।

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Author: Vindhya Times

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