MP News: मध्यप्रदेश सरकार कर्ज चुकाने के लिए बेच रही संपत्तियां, 10 साल में 101 लोक संपत्तियों की नीलामी
MP News: मध्यप्रदेश सरकार बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने के लिए लगातार लोक संपत्तियों की बिक्री कर रही है। पिछले 10 वर्षों में 101 संपत्तियों की नीलामी से करीब 1110 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं, जबकि राज्य पर कुल कर्ज लगभग 5 लाख करोड़ रुपए पहुंच चुका है।
लोक परिसंपत्ति विभाग बना
साल 2016 में राज्य में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य सरकारी संपत्तियों का प्रबंधन और उनके बेहतर उपयोग के जरिए राजस्व बढ़ाना था। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इतने वर्षों बाद भी इस विभाग के पास राज्य के बाहर स्थित संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। विभाग फिलहाल केवल मध्यप्रदेश के भीतर की संपत्तियों की बिक्री तक सीमित है। विधानसभा में दिए गए जवाबों से यह स्पष्ट हुआ है कि संपत्तियों के प्रबंधन में अभी भी कई खामियां बनी हुई हैं।
101 संपत्तियां बेचकर जुटाए 1110 करोड़ रुपए
पिछले करीब एक दशक में सरकार ने बस डिपो, सहकारी कारखानों और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों को बेचकर राजस्व जुटाने का प्रयास किया है। मुरैना, शहडोल, ब्यावरा और तराना जैसे शहरों में बस डिपो की जमीनें करोड़ों रुपए में बेची गईं। इसके अलावा तिलहन संघ के प्लांट, पुराने जेल परिसर, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस और सोयाबीन प्रसंस्करण इकाइयों जैसी संपत्तियां भी नीलाम की जा चुकी हैं। इन सभी बिक्री से सरकार को कुल मिलाकर लगभग 1110 करोड़ रुपए की आमदनी हुई है।
राज्य के बाहर भी करोड़ों की संपत्तियां
मध्यप्रदेश सरकार की कई कीमती संपत्तियां अन्य राज्यों में भी मौजूद हैं, जिनका अब धीरे-धीरे आकलन किया जा रहा है। केरल के वायनाड में स्थित 554 एकड़ की बीनाची एस्टेट सबसे प्रमुख संपत्तियों में से एक है, जिसकी कीमत अरबों रुपए आंकी जा रही है। इसके अलावा मुंबई के गोरेगांव में 2.5 एकड़ जमीन और एक पुरानी बहुमंजिला इमारत भी सरकार के पास है। नागपुर में बस डिपो की जमीन और झांसी में लगभग 19 एकड़ भूमि को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया जारी है।
विवाद और अनियमितताएं भी आईं सामने
संपत्तियों की बिक्री के दौरान कई विवाद भी सामने आए हैं। कुछ मामलों में स्टांप शुल्क जमा नहीं किए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद पंजीयन विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। वहीं कई संपत्तियों पर कानूनी विवाद या कब्जे की स्थिति भी बनी हुई है। इन कारणों से सरकार को अपेक्षित राजस्व प्राप्त करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ते कर्ज के दबाव में फैसले
प्रदेश पर करीब 5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है, जिसे चुकाने के लिए सरकार को नए विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। कई बार पुराने कर्ज और उसके ब्याज को चुकाने के लिए भी नया कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे में संपत्तियों की बिक्री सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर सामने आई है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और सही मूल्यांकन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कैबिनेट में फिर आ सकता है प्रस्ताव
हाल ही में केरल स्थित संपत्ति को बेचने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया था, लेकिन संभावित राजस्व का सही आकलन न होने के कारण इसे टाल दिया गया। अब संभावना जताई जा रही है कि अगली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को दोबारा पेश किया जाएगा। सरकार अन्य राज्यों में स्थित संपत्तियों के प्रबंधन और बिक्री को लेकर भी रणनीति तैयार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक राजस्व जुटाया जा सके।
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Author: Vindhya Times
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