MP News: मध्यप्रदेश सरकार ने मार्च में चौथी बार लिया कर्ज, वित्तीय बोझ बढ़ा
MP News: मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष के अंत में मार्च में ही चौथी बार कर्ज उठाया है। शुक्रवार को 2,500 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया गया, जिससे मार्च माह में लिया गया कुल कर्ज 18,700 करोड़ रुपए और इस वित्तीय वर्ष का कुल कर्ज 91,500 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते, लाड़ली बहना योजना और अन्य योजनाओं के लिए यह कर्ज अनिवार्य हो गया है। नीति आयोग भी बढ़ते कर्ज और ब्याज को लेकर चिंता जता चुका है।
मार्च में लगातार कर्ज
मध्यप्रदेश सरकार ने मार्च महीने में वित्तीय वर्ष के अंत तक चौथी बार कर्ज उठाया। शुक्रवार को सरकार ने दो भागों में कुल 2,500 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया। वित्त विभाग के अनुसार, पहला कर्ज 1,500 करोड़ का 14 साल के लिए और दूसरा 1,000 करोड़ रुपए का 24 साल के लिए लिया गया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से इन कर्जों की प्रक्रिया मुंबई में पूरी हुई और इनका भुगतान 30 मार्च को होना तय है। मार्च माह में अब तक लिया गया कर्ज कुल 18,700 करोड़ रुपए पहुंच गया है। इस वित्तीय वर्ष में सरकार का कुल कर्ज 91,500 करोड़ रुपए हो गया है।
वित्तीय दबाव बढ़ा
पहले ही 3 मार्च को 6,300 करोड़ और 10 मार्च को 5,800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। 17 मार्च को सरकार ने 4,100 करोड़ रुपए और अब 2,500 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लिया। कर्ज लेने की यह प्रक्रिया सरकार की वित्तीय मजबूरी को दिखाती है। कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) के अलावा लाड़ली बहना योजना जैसी हितकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता है। अप्रैल से सरकारी कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा, और एरियर का भुगतान भी करना होगा, जिससे कर्ज लेना अनिवार्य हो गया।
नीति आयोग की चेतावनी और वित्तीय स्वास्थ्य
नीति आयोग ने हाल ही में अपनी दूसरी वार्षिक फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश सरकार के बढ़ते कर्ज और ब्याज को लेकर चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार का लगातार कर्ज लेना वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिमपूर्ण है। आयोग ने सलाह दी है कि राज्य को अपनी वित्तीय योजनाओं में सतर्कता बरतनी चाहिए और लंबी अवधि के लिए कर्ज का संतुलन बनाना आवश्यक है।
कर्ज लेना सरकार की मजबूरी
राज्य सरकार ने कई बड़े विकास और कल्याणकारी कार्यक्रम चलाए हैं, जिन पर अरबों रुपए खर्च हो रहे हैं। लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी भारी धनराशि खर्च की जा रही है। ऐसे में कर्ज लेना सरकार की मजबूरी बन गया है। वित्त विभाग का कहना है कि इस नए कर्ज का उपयोग पूंजीगत व्यय और वित्तीय उत्पादक परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। यह कदम विकास कार्यों को जारी रखने और योजनाओं के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
कर्ज लेने के प्रमुख मौके और आंकड़े
मार्च माह में लिया गया कर्ज इस प्रकार है:
- 3 मार्च: 6,300 करोड़ रुपए (कर्मचारियों के DA के लिए)
- 10 मार्च: 5,800 करोड़ रुपए (लाड़ली बहना योजना के लिए)
- 17 मार्च: 4,100 करोड़ रुपए
- 24 मार्च: 2,500 करोड़ रुपए (नए कर्ज के रूप में)
इन कर्जों के बाद सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है। मार्च माह में ही कुल कर्ज 18,700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जबकि इस वित्तीय वर्ष का कुल कर्ज 91,500 करोड़ रुपए हो गया है। सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यह कर्ज वित्तीय उत्पादक प्रोजेक्ट्स और पूंजीगत व्यय के लिए उपयोग किया जाएगा। कर्मचारियों के वेतन, महंगाई भत्ते और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
सरकारी योजनाओं के लिए कर्ज लेना जरूरी
मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में कर्मचारियों के 3% महंगाई भत्ते की घोषणा की थी, और अप्रैल से वेतन एरियर का भुगतान भी करना है। लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार को पहले ही करोड़ों रुपए खर्च करने पड़े हैं। राज्य में विकास परियोजनाओं के लिए भी धन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और अवसंरचना विकास के लिए उठाया गया यह कर्ज इन योजनाओं को निरंतर बनाए रखने में मदद करेगा।
नीति आयोग ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए कर्ज और व्यय में संतुलन बनाना अनिवार्य है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कर्ज की स्थिति इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में ब्याज भुगतान भी सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।
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Author: Vindhya Times
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