MP News: मध्य प्रदेश में बिजली दरें बढ़ने के संकेत, डिस्कॉम ने 10% तक टैरिफ बढ़ाने की मांग की
MP News: मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में बिजली महंगी हो सकती है, राज्य की पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) के सामने रखा है.
टैरिफ पिटीशन नियामक आयोग में दाखिल
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 30 नवंबर 2025 से पहले टैरिफ पिटीशन आयोग में जमा कर दी थी, इस पिटीशन में राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों, मध्य क्षेत्र, पूर्व क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र ने बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की अनुमति मांगी है.
भारी घाटे का हवाला
कंपनियों का कहना है कि, वे पिछले कई वर्षों से लगातार वित्तीय घाटे में चल रही हैं। आंकड़ों के अनुसार,
• मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी करीब 18,712 करोड़ रुपये,
• पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी 16,378 करोड़ रुपये,
• पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी 7,285 करोड़ रुपये के घाटे में है।
यह स्थिति कंपनियों की वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है.
पहले भी कम मिली बढ़ोतरी की मंजूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते वर्षों में भी कंपनियों ने दरों में वृद्धि का प्रस्ताव रखा था, लेकिन आयोग ने अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी को ही मंजूरी दी,
जैसे,
• 2021-22 में 6.23% प्रस्तावित, मंजूर सिर्फ 0.63%
• 2022-23 में 8.71% प्रस्तावित, मंजूर 2.64%
• 2023-24 में 3.20% प्रस्तावित, मंजूर 1.65%
• 2024-25 में 3.86% प्रस्तावित, मंजूर 0.07%
• 2025-26 में 7.52% प्रस्तावित, मंजूर 3.46%
आयोग करेगा जनसुनवाई
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ पिटीशन को स्वीकार कर लिया है, अब इस पर जनसुनवाई कराई जाएगी, जिसमें आम उपभोक्ता, उद्योग, व्यापारी संगठन और अन्य हितधारक अपनी राय रख सकेंगे, आयोग जल्द ही जनसुनवाई की तारीख घोषित करेगा.
1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकती हैं नई दरें
यदि आयोग बिजली दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी देता है, तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी, आयोग सभी सुझावों और वित्तीय आंकड़ों की समीक्षा के बाद अंतिम फैसला लेगा.
कंपनियों का तर्क – बढ़ोतरी जरूरी
पावर कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि, बिजली खरीद, रखरखाव और संचालन लागत में लगातार इजाफा हो रहा है, यदि घाटे की भरपाई नहीं की गई, तो भविष्य में बिजली आपूर्ति और सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.
उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी लागू होती है, तो इसका सीधा असर घरेलू, औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ेगा, इससे आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है, आयोग की जनसुनवाई प्रक्रिया में उपभोक्ताओं को अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने का अवसर मिलेगा, इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि, फैसला केवल कंपनियों के हित में नहीं, बल्कि जनहित को ध्यान में रखकर लिया जाए.
अंतिम फैसला आयोग के हाथ
फिलहाल बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, आयोग की सुनवाई और मूल्यांकन के बाद ही यह साफ होगा कि, 2026-27 में बिजली कितनी महंगी होगी या राहत मिलेगी.
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Author: Vindhya Times
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