Rewa News: रीवा में बारदाने की कमी से धान खरीदी ठप, प्रशासन पर उठे सवाल

Rewa News: रीवा में बारदाने की कमी से धान खरीदी ठप, प्रशासन पर उठे सवाल

Rewa News: रीवा में बारदाने की कमी से धान खरीदी ठप, प्रशासन पर उठे सवाल

Rewa News: धान खरीदी के दौरान बारदाने की भारी कमी के कारण जिले में उपार्जन व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है, कई उपार्जन केंद्रों पर धान की तौलाई नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, प्रशासनिक लापरवाही और पूर्व नियोजन की कमी इस संकट की बड़ी वजह मानी जा रही है.

आपूर्ति की योजना असफल

प्रशासन ने इस बार उपार्जन केंद्रों की संख्या और संभावित धान उत्पादन का आकलन तो किया, लेकिन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग बारदाने की पर्याप्त मात्रा का अनुमान लगाने में असफल रहा, परिणामस्वरूप कई केंद्रों पर बारदाने की कमी के चलते खरीदी प्रक्रिया बाधित हो गई.

समितियों के केंद्र सबसे ज्यादा प्रभावित

बारदाने की कमी का सबसे अधिक असर समितियों के स्तर पर संचालित उपार्जन केंद्रों में देखने को मिला है, गोदाम स्तर पर पर्याप्त बारदाने होने के बावजूद समितियों तक इसकी आपूर्ति नहीं हो पाई, जिससे किसानों की तौलाई रुक गई.

Rewa News: बारदाने की कमी और सत्यापन प्रक्रिया से धान उपार्जन केंद्रों पर  हाहाकार, किसान ठंड में परेशान

पत्र देर से भेजने पर उठे सवाल

अधिकारियों का कहना है कि, शासन को बारदाने की मांग का पत्र भेज दिया गया है, लेकिन यह पत्र तब भेजा गया जब खरीदी पहले ही प्रभावित हो चुकी थी, यदि यह मांग पहले की जाती, तो किसानों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता, इस मुद्दे पर प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है.

कुछ क्षेत्रों में पहले से व्यवस्था

रीवा ब्लॉक और गुढ़ तहसील के कुछ उपार्जन केंद्रों में स्थिति सामान्य बनी हुई है, क्योंकि, वहां समितियों ने मिलरों से पहले ही बारदाने की व्यवस्था कर ली थी, लेकिन जिले के अधिकांश अन्य ब्लॉकों में बारदाने की कमी के कारण स्लॉट बुक होने के बावजूद धान तौलाई नहीं हो पा रही है.

तराई क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर

जवा और त्योंथर तहसील जैसे तराई क्षेत्रों में बारदाने की कमी का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला, गुरुवार दोपहर से कई केंद्रों पर धान उपार्जन पूरी तरह बंद करना पड़ा, केवल वही केंद्र संचालित हो सके, जहां पहले से बारदाने उपलब्ध थे.

ठंड और कोहरे में किसान परेशान

कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच किसान रात-दिन अपने धान लेकर उपार्जन केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन बारदाने की कमी के कारण तौलाई नहीं हो पा रही है, इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ रहा है.

उपार्जन योजना में गंभीर खामियां उजागर

इस पूरे मामले ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, हर साल होने वाली उपार्जन प्रक्रिया के बावजूद इस बार आपात स्थिति से निपटने का कोई ठोस प्लान नजर नहीं आया.

पूर्व नियोजन की कमी बनी किसानों की परेशानी

यदि प्रत्येक ब्लॉक, उपार्जन केंद्र और किसानों की संख्या के अनुसार बारदाने की जरूरत का सही आकलन किया जाता, तो यह स्थिति नहीं बनती, खासकर ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में यह कमी सबसे ज्यादा नुकसानदायक साबित हुई है.

तत्काल समाधान और दीर्घकालिक योजना जरूरी

वर्तमान संकट से निपटने के लिए प्रशासन को तत्काल बारदाने की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी, साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए योजनाबद्ध और पारदर्शी उपार्जन नीति बनाना आवश्यक है, ताकि किसानों को उनकी उपज का समय पर और उचित मूल्य मिल सके.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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