Satna News: सतना में टीईटी छूट की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा
Satna News: सतना में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट की मांग को लेकर सैकड़ों शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने राष्ट्रपति के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति की मांग करेंगे। इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय से जुड़ा बताया जा रहा है।
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपा
शुक्रवार शाम सतना में बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्र हुए और कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से सेवा दे रहे हैं और अचानक परीक्षा अनिवार्य करना उचित नहीं है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रक्रिया शुरू
शिक्षकों के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश के आधार पर यह प्रक्रिया लागू की जा रही है। बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया है। आदेश के अनुसार यदि शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इस स्थिति से प्रदेश के हजारों शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं।
लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों की चिंता
ज्ञापन में कहा गया है कि कई शिक्षक 20 से 25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। सेवा के अंतिम वर्षों में परीक्षा अनिवार्य किए जाने से उनमें मानसिक तनाव की स्थिति बन रही है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद नौकरी पर संकट उनके भविष्य और सम्मान के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है।
सरकार और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील
शिक्षकों ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रखे। साथ ही राष्ट्रपति से शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग की गई है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति की मांग करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति तत्कालीन नियमों के अनुसार हुई थी, इसलिए बाद के प्रावधानों से सेवा पर असर नहीं पड़ना चाहिए।
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Author: Vindhya Times
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