Sidhi News: सीधी में जनता की नाराजगी पर कार्रवाई कलेक्टर हटाए गए, अब मुआवजे की मांग

Sidhi News: सीधी में जनता की नाराजगी पर कार्रवाई कलेक्टर हटाए गए, अब मुआवजे की मांग

Sidhi News: सीधी में जनता की नाराजगी पर कार्रवाई कलेक्टर हटाए गए, अब मुआवजे की मांग

Sidhi News: सीधी जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने वैध मकानों को ‘खंडहर’ बताकर ढहाने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े रुख के बाद कलेक्टर स्वरोचिस सोमवंशी को उनके पद से हटा दिया गया है। यह फैसला प्रशासनिक लापरवाही, जनसुनवाई में अनुपस्थिति और पीड़ितों के प्रति संवेदनहीनता के आरोपों के बाद लिया गया है।

खंडहर घोषित किए गए पीएम आवास

यह पूरा मामला सीधी शहर के वार्ड क्रमांक 4 का है, जहाँ एसडीएम राकेश शुक्ला ने साल 2017-18 में बनकर तैयार हुए प्रधानमंत्री आवासों को अचानक ‘खंडहर’ घोषित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज और आवंटित इन पक्के मकानों को बिना ठोस आधार के असुरक्षित बता दिया गया। इसके तुरंत बाद एक मकान को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया गया, जिससे वहां रह रहे परिवारों में हड़कंप मच गया और स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश पैदा हो गया।

प्रभावित परिवार और अधिकारियों का दबाव

इस प्रशासनिक कार्रवाई की गाज 7 परिवारों के लगभग 58 सदस्यों पर गिरी, जो कड़ाके की धूप और बदलते मौसम में खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हो गए। पीड़ितों का आरोप है कि राजस्व अधिकारियों ने उन्हें न केवल डराया-धमकाया, बल्कि जबरन मकान खाली करने का दबाव भी बनाया। विवाद ने जब राजनीतिक तूल पकड़ा और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन तेज किया, तब जाकर एसडीएम ने अपने आदेश को वापस लेने की बात कही, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था।

लापरवाही और प्रतिबंधात्मक आदेश

कलेक्टर स्वरोचिस सोमवंशी को हटाए जाने के पीछे मुख्य कारण जनता और सरकार के बीच बढ़ती दूरी को माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों की शिकायत थी कि कलेक्टर जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं रहते थे और आम जनता की समस्याओं को दरकिनार कर देते थे। इसके अलावा, शासकीय कार्यालयों के आसपास धारा 144 जैसे प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करने से आम आदमी का अधिकारियों तक पहुंचना और अपनी गुहार लगाना लगभग असंभव हो गया था।

मुआवजे की मांग और आगामी कार्रवाई

कलेक्टर को हटाए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए शिवसेना और एनएसयूआई जैसे संगठनों ने अब दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि सिर्फ स्थानांतरण न्याय नहीं है; उनके आशियाने को गिराने वाले अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, बेघर हुए परिवारों ने सरकार से तत्काल मुआवजे और मकानों के पुनर्निर्माण की मांग की है ताकि वे फिर से अपना जीवन सामान्य कर सकें।

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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