MP News: नारी वंदन अधिनियम चर्चा के बीच मप्र में पोषण आहार प्लांट बंद, महिलाएं मजदूरी को मजबूर
MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा में नारी वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान महिलाओं की आर्थिक स्थिति से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। प्रदेश में पोषण आहार प्लांट चलाने वाली वे महिलाएं, जिन्हें करीब 9 साल पहले स्वामित्व दिया गया था, आज आर्थिक संकट के कारण मजदूरी करने को मजबूर हो रही हैं।
कई जिलों में प्लांट बंद
सागर की अनिता चौकसे के अनुसार उनका प्लांट पिछले तीन महीने से बंद है क्योंकि सरकार से पर्याप्त राशि नहीं मिल पा रही है और वेंडरों का भुगतान अटका हुआ है। देवास की दुर्गा ने बताया कि उनका प्लांट 24 दिन तक बंद रहा और अब किसी तरह दोबारा शुरू किया गया है। वहीं मंडला की मनीषा परस्ते ने एक महीने से प्लांट बंद होने की जानकारी दी।

महिला समूहों का प्रदर्शन और नाराजगी
लगातार आर्थिक संकट से परेशान महिला स्व-सहायता समूहों ने रविवार को सागर, देवास और मंडला में प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण संचालन मुश्किल हो गया है और उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है, सूत्रों के अनुसार घाटा पूरा करने के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित थी, लेकिन यह मामला कैबिनेट तक नहीं पहुंच सका, जिसके कारण अब तक मंजूरी अटकी हुई है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
पुरानी दरों से बढ़ा घाटा
वर्ष 2018-19 में बच्चों के पोषण आहार की दर 8 रुपये और महिलाओं व किशोरियों के लिए 9.50 रुपये तय की गई थी। उस समय स्व-सहायता समूह 10 करोड़ रुपये का माल तैयार करते थे, लेकिन सरकार से केवल 8 करोड़ रुपये का भुगतान मिलता था, जिससे लगातार घाटा बढ़ता गया।
नई दरें भी अभी लागू नहीं
हाल ही में दरों को बढ़ाकर 12 रुपये किया गया है, लेकिन अभी यह नई दरें लागू नहीं हो पाई हैं, जिससे भुगतान और संचालन में देरी बनी हुई है, स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्राइवेट सप्लायरों ने पुराना भुगतान न मिलने के कारण सामग्री की सप्लाई रोक दी। बताया जा रहा है कि 7 प्लांट्स पर लगभग 300 करोड़ रुपये की देनदारी हो चुकी है।
कैबिनेट में अटका प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार मार्च में पंचायत विभाग ने कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें 239 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई का उल्लेख था, जो अब बढ़कर करीब 300 करोड़ तक पहुंच चुका है। लेकिन यह प्रस्ताव अब तक कैबिनेट में नहीं पहुंच पाया है।
महिलाओं की आजीविका पर गंभीर असर
इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर उन महिलाओं पर पड़ा है, जो इन पोषण आहार प्लांटों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रही थीं। कई स्थानों पर काम बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
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Author: Vindhya Times
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