MP News: मुरैना में कबाड़ निस्तारण पर विवाद, करोड़ों की संपत्ति को कम कीमत पर बेचने के आरोप

MP News: मुरैना में कबाड़ निस्तारण पर विवाद, करोड़ों की संपत्ति को कम कीमत पर बेचने के आरोप

MP News: मुरैना में कबाड़ निस्तारण पर विवाद, करोड़ों की संपत्ति को कम कीमत पर बेचने के आरोप

MP News: मुरैना में जल संसाधन विभाग की ई एंड एम शाखा में रखे गए भारी मात्रा के लोहे के कबाड़ के निस्तारण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि विभाग में वर्षों से जमा कबाड़ को वर्तमान बाजार मूल्य के बजाय बेहद पुराने मूल्यांकन के आधार पर बेचने की तैयारी की जा रही है, जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है।

250 tonnes of scrap

विभागीय स्टोर में रखा है भारी मात्रा में कबाड़

जानकारी के अनुसार चंबल कॉलोनी स्थित विभागीय स्टोर में लंबे समय से मशीनरी, उपकरण और लोहे का कबाड़ जमा है। इसकी मात्रा करीब 250 मीट्रिक टन बताई जा रही है। बाजार में लोहे के कबाड़ की मौजूदा कीमत को देखते हुए इसकी कुल कीमत लाखों से लेकर करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है।

निस्तारण प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल कबाड़ के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाने के बजाय पुराने मूल्यांकन के आधार पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इससे सरकारी संपत्ति के वास्तविक मूल्य प्राप्त होने को लेकर संदेह पैदा हो गया है, यदि कबाड़ का निस्तारण वर्तमान बाजार दरों के अनुरूप नहीं किया गया तो शासन को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।

मंत्री ने दिए जांच के संकेत

प्रकरण सामने आने के बाद प्रदेश के जल संसाधन मंत्री ने मामले की जांच कराने और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। इससे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता बढ़ गई है, जिला प्रशासन ने भी शिकायत मिलने पर पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

किसे होगा फायदा?

विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि कम कीमत पर कबाड़ बेचने की कोशिश की जा रही है, तो इससे लाभ किसे मिलने वाला है। यही सवाल अब जांच का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। जांच एजेंसियों को यह भी देखना होगा कि प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही या जानबूझकर की गई अनियमितता तो नहीं हुई, फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह सरकारी संपत्तियों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मामला बन सकता है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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