MP News: गुना–अशोकनगर के गांवों में अजीब परंपरा, मांगलिक कार्यों पर लगी सामाजिक बंदिश

MP News: गुना–अशोकनगर के गांवों में अजीब परंपरा, मांगलिक कार्यों पर लगी सामाजिक बंदिश

MP News: गुना–अशोकनगर के गांवों में अजीब परंपरा, मांगलिक कार्यों पर लगी सामाजिक बंदिश

MP News: मध्य प्रदेश के गुना और अशोकनगर जिलों के कई गांवों में एक ऐसी सामाजिक परंपरा सामने आई है, जिसने ग्रामीण जीवन की खुशियों को लगभग ठहरा दिया है। जानकारी के अनुसार, करीब 100 से अधिक गांवों में पिछले डेढ़ साल से गांव के भीतर शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य नहीं हो रहे हैं, ढोल-नगाड़ों और शहनाइयों से गूंजने वाले आंगन अब शांत हैं, जिससे गांवों में एक अजीब सा सन्नाटा बना हुआ है।

एमपी के 100 से ज्यादा गांव जहां शादी पर रोक! यहां अपने ही घर से विदा नहीं  होतीं बेटियां | Marriage Ban After Murder Traditional Custom In More Than  100 Villages Including Takneri

टकनेरी गांव बना प्रमुख उदाहरण

इस स्थिति का सबसे स्पष्ट उदाहरण गुना जिले का टकनेरी गांव बताया जा रहा है। यहां करीब डेढ़ साल से किसी भी परिवार की शादी गांव के भीतर नहीं हुई है। गांव में उत्सव जैसा माहौल खत्म हो गया है और सामाजिक जीवन पर इसका गहरा असर दिख रहा है।

परंपरा के पीछे की वजह

ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा तब लागू होती है जब गांव में कोई बड़ी अप्रिय घटना, जैसे हत्या या गंभीर विवाद हो जाता है। ऐसी स्थिति में तब तक गांव में शादी-ब्याह जैसे आयोजन नहीं किए जाते, जब तक मामला सामाजिक रूप से ‘समाप्त’ न मान लिया जाए या संबंधित परिवार में कोई विवाह संपन्न न हो जाए, करीब डेढ़ साल पहले टकनेरी गांव में हुई एक हत्या की घटना के बाद से यह स्थिति बनी हुई बताई जा रही है।

गांव से बाहर हो रहे विवाह

इस परंपरा का सीधा असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है। कई परिवारों को मजबूरी में शादी समारोह गांव से बाहर करना पड़ रहा है। कुछ संपन्न परिवार शहरों में होटल या मैरिज गार्डन बुक कर पा रहे हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह भारी बोझ बन गया है, गांव के लोगों के मुताबिक, इस सीजन में ही कई परिवारों ने अपने बच्चों की शादी गांव के बाहर कर दी है। इससे न केवल अतिरिक्त खर्च बढ़ा है, बल्कि अपने ही गांव में शादी करने की पारंपरिक खुशी भी छिन गई है, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

समाज में बढ़ती बहस

स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब बहस का विषय बन गया है। एक ओर इसे पुरानी सामाजिक परंपरा और अनुशासन माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी इसे आधुनिक समय के खिलाफ और आर्थिक रूप से बोझिल व्यवस्था बता रही है, सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसी परंपराओं में समय के साथ बदलाव जरूरी है। उनका कहना है कि शिक्षा और जागरूकता के जरिए ही इस तरह की बंदिशों को कम किया जा सकता है, ताकि ग्रामीण समाज में फिर से सामान्य और खुशहाल माहौल लौट सके।

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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