Rewa News: रीवा के उपरहटी में विराजे प्राचीन शिवलिंग की अनोखी मान्यता, महाकाल से होती है तुलना

Rewa News: रीवा के उपरहटी में विराजे प्राचीन शिवलिंग की अनोखी मान्यता, महाकाल से होती है तुलना

Rewa News: रीवा के उपरहटी में विराजे प्राचीन शिवलिंग की अनोखी मान्यता, महाकाल से होती है तुलना

Rewa News: रीवा को भगवान महामृत्युंजय की नगरी के रूप में जाना जाता है और यहां कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जिनका इतिहास आज भी लोगों को आकर्षित करता है. शहर के उपरहटी मोहल्ले की एक संकरी गली में ऐसा ही प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां विराजमान शिवलिंग बेहद प्राचीन है और इसकी तुलना उज्जैन के राजाधिराज महाकाल से की जाती है. मौजूदा समय में अतिक्रमण के कारण मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं है, लेकिन सावन के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आस्था और भी बढ़ जाती है.

रीवा के उपरहटी में विराजे ‘पड़ोसी बाबा’, हजार साल पुराने शिवलिंग से जुड़ी अनोखी आस्था

महाराजा की पुस्तक में मंदिर का उल्लेख

स्थानीय लोगों के मुताबिक इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है. रीवा रियासत के महाराजा रघुराज सिंह ने अपनी पुस्तक में भी इस मंदिर के वैभव और धार्मिक महत्व का उल्लेख किया था. कहा जाता है कि मंदिर की देखरेख के लिए किसी विशेष पंडा या पुजारी की व्यवस्था नहीं थी. आसपास रहने वाले लोग ही भगवान को भोग लगाते और मंदिर की देखभाल करते थे. इसी वजह से इसे स्थानीय लोगों के बीच पड़ोसी बाबा के नाम से भी जाना जाने लगा.

शिवलिंग की जलहरी है खास

मंदिर के वर्तमान पुजारी पं. चंद्रशेखर द्विवेदी के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग कम से कम एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है. मंदिर में विराजमान शिवलिंग की जलहरी सामान्य रूप से सीधी न होकर टेढ़ी और पश्चिम दिशा की ओर मुड़ी हुई बताई जाती है. इसी विशेषता के कारण स्थानीय श्रद्धालु इसकी तुलना उज्जैन के महाकाल मंदिर में विराजमान शिवलिंग से करते हैं. मंदिर की यह विशेषता इसे रीवा के अन्य प्राचीन धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है.

हर महीने होती है विशेष भस्म आरती

मंदिर में धार्मिक परंपराओं के तहत हर महीने की पहली तारीख को भस्म आरती आयोजित की जाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस आरती में कंडे की राख का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए खास माना जाता है. सावन के महीने में मंदिर में पूजा और दर्शन के लिए भक्तों की संख्या बढ़ जाती है. श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक और पूजन करते हैं.

रंगपंचमी पर होता है विशेष आयोजन

मंदिर में साल के दो प्रमुख आयोजनों का विशेष महत्व बताया जाता है. पहला आयोजन हर महीने होने वाली भस्म आरती से जुड़ा है, जबकि दूसरा होली के पांचवें दिन रंगपंचमी पर होता है. इस अवसर पर भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार, अभिषेक और पूजा की जाती है. स्थानीय शिवभक्तों के अनुसार इस आयोजन में रीवा के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. यही धार्मिक परंपराएं इस प्राचीन मंदिर की पहचान को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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