Rewa News: रीवा में साइबर ठगी से हड़कंप, 7 महीने में 250 से ज्यादा लोग बने शिकार
Rewa News: रीवा में साइबर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. जनवरी से जुलाई तक करीब 7 महीनों में 250 से ज्यादा लोग साइबर ठगी का शिकार हुए हैं. सामने आए मामलों के मुताबिक जालसाजों ने अलग-अलग तरीकों से पीड़ितों से करीब एक करोड़ रुपये की रकम ऐंठ ली. पुलिस तक पहुंचने वाले मामले ही यह तस्वीर दिखाते हैं, जबकि कई लोग शिकायत दर्ज कराने से बच जाते हैं. इन दिनों एपीके फाइल के जरिए होने वाली ठगी भी तेजी से बढ़ रही है.
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वर्क फ्रॉम होम के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी
साइबर अपराधी लोगों को ऑनलाइन जॉब और वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर रकम ट्रांसफर करा रहे हैं. इसके अलावा फर्जी क्रेडिट मैसेज भेजकर भी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. कई मामलों में मोबाइल पर एपीके फाइल डाउनलोड करवाकर ठगी की गई. ठग अलग-अलग बहाने बनाकर लोगों से बैंकिंग जानकारी हासिल करते हैं या उनके खाते से पैसे निकाल लेते हैं. पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सतर्कता बेहद जरूरी है.
ठगी होते ही तुरंत शिकायत करें
अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड होता है तो उसे देरी किए बिना शिकायत करनी चाहिए. सबसे पहले पेमेंट एप से ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट, ट्रांजेक्शन आईडी या यूटीआर सुरक्षित रखना जरूरी है. इसके बाद 1930 पर साइबर शिकायत दर्ज की जा सकती है. संबंधित दस्तावेजों के साथ नजदीकी पुलिस थाने या साइबर सेल में शिकायत भी करनी चाहिए. शिकायत दर्ज कराने के बाद उसका नंबर जरूर सुरक्षित रखें, क्योंकि शुरुआती समय में कार्रवाई होने पर रकम बचने की संभावना बढ़ जाती है.
होल्ड रकम वापस पाने की प्रक्रिया
पुलिस कार्रवाई के दौरान अगर ठगी की रकम किसी बैंक खाते में होल्ड कर दी जाती है, तो उसे वापस पाने के लिए न्यायालय की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है. संबंधित व्यक्ति को जरूरी दस्तावेजों के साथ अदालत में आवेदन देना होता है. इसके बाद न्यायालय पुलिस से मामले और होल्ड खाते से जुड़ी जानकारी मांग सकता है. जांच से संबंधित दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड प्रस्तुत होने के बाद अदालत के निर्देश पर रकम वापस कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.
गरीबों के नाम पर खुल रहे बैंक खाते
साइबर ठग अब दूसरे लोगों के बैंक खातों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक कुछ मामलों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं और इन्हीं खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती है. रकम को कई अलग-अलग खातों में घुमाकर जांच को भटकाने की कोशिश की जाती है. पुलिस को ऐसे खातों की जानकारी मिलने पर उन्हें फ्रीज किया जाता है, ताकि ठगी की रकम को सुरक्षित रखा जा सके. लोगों को अनजान व्यक्तियों के कहने पर बैंक खाता खुलवाने या अपना खाता किसी और को इस्तेमाल करने देने से बचना चाहिए.
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Author: Vindhya Times
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