मैहर मां शारदा धाम: 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित 1500 साल पुराना मंदिर, आल्हा-ऊदल और रहस्यमयी अखंड ज्योति की कहानी
मैहर मां शारदा धाम: मध्य प्रदेश के मैहर जिले में त्रिकूट पर्वत पर स्थित मां शारदा देवी का मंदिर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए अगाध आस्था, भक्ति और पौराणिक मान्यताओं का एक प्रमुख केंद्र है, विंध्य पर्वतमाला की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच करीब 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग एक हजार सीढ़ियों की चढ़ाई पूरी करनी पड़ती है, जबकि रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी मात्र 2 से 3 किलोमीटर है, पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के तांडव के दौरान यहां माता सती का हार गिरा था, जिसके कारण इस पवित्र स्थान का नाम ‘माई का हार’ से अपभ्रंश होकर मैहर पड़ा, यहां स्थापित मां शारदा की प्रतिमा को लगभग 1500 साल पुरानी माना जाता है.

आल्हा-ऊदल की 12 साल की तपस्या
मंदिर से जुड़ी लोककथाओं के अनुसार, चंदेल राजा परमाल के वीर सेनापति आल्हा और ऊदल मां शारदा के परम भक्त थे, मान्यता है कि उन्होंने ही घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच इस प्राचीन मंदिर की खोज की थी, इसके बाद आल्हा ने देवी को प्रसन्न करने के लिए 12 साल तक कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर मां ने उन्हें अमरता और आशीर्वाद प्रदान किया था, किंवदंती है कि आज भी रात में मंदिर के पट बंद होने के बाद आल्हा और ऊदल सबसे पहले माता की पूजा करने आते हैं, यही वजह है कि सुबह जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तो मां की मूर्ति ताजे फूलों से सजी हुई और अक्षत अर्पित पाए जाते हैं, सुरक्षा की दृष्टि से रात 12 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं और परिसर में किसी के रुकने की मनाही है.
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50 साल से प्रज्जवलित अखंड ज्योति
प्रधान पुजारी के अनुसार, मंदिर के पीछे स्थित एक गुफा में पिछले 50 वर्षों से लगातार अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित हो रही है, इस ज्योति की शुरुआत पूर्व प्रधान पुजारी स्वर्गीय देवी प्रसाद द्वारा मां के निर्देश पर शुरू की गई साधना से जुड़ी हुई है, इसके अलावा, मां शारदा के मुख्य मंदिर परिसर में भगवान हनुमानजी और भगवान नृसिंह की प्राचीन प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, मान्यता है कि हनुमानजी मां शारदा के पुत्र और मंदिर के मुख्य पहरेदार के रूप में विराजमान हैं, श्रद्धालु मां के दर्शन के साथ इन दोनों देवताओं के भी दर्शन अवश्य करते हैं.

शारदीय नवरात्र पर विशेष प्रबंध
शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मैहर धाम में देश के कोने-कोने से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है, पर्व के दौरान मंदिर में प्रतिदिन सुबह 4 बजे मंगला आरती के वक्त मां को 56 प्रकार के व्यंजनों का भव्य भोग लगाया जाता है, जबकि दोपहर और रात में भी पारंपरिक भोग अर्पित किए जाते हैं, नवरात्र के इन विशेष दिनों में मंदिर रोजाना करीब 19 घंटे खुला रहता है, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सीढ़ियों और रोपवे मार्ग पर विशेष बैरिकेडिंग की गई है, साथ ही मेला क्षेत्र व त्रिकूट पर्वत पर 650 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के अलावा सुरक्षा और सुगम व्यवस्था के लिए 114 सीसीटीवी कैमरे और दो ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है.
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Author: Vindhya Times
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