MP Special Story: मंदसौर के धौलागढ़ महादेव मंदिर में विराजमान हैं भगवान कुबेर, धनतेरस पर होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान
सुबह चार बजे से शुरू होंगे धार्मिक आयोजन
धनतेरस के अवसर पर 6 नवंबर को मंदिर में सुबह चार बजे से धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे. ब्रह्म मुहूर्त में भगवान का महाभिषेक किया जाएगा, इसके बाद विशेष पूजन और आकर्षक श्रृंगार होगा. दिनभर हवन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे. सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू होने और देर रात तक दर्शन के लिए कतारें लगने की संभावना है. रात्रि में हवन की पूर्णाहुति के साथ विशेष अनुष्ठान संपन्न होंगे.

पशुपतिनाथ मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर है मंदिर
विश्वविख्यात श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर खिलचीपुरा में स्थित श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता और विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. धनतेरस पर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान कुबेर के दर्शन कर सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति की कामना करते हैं. मंदिर में भगवान शिव के साथ कुबेर की उपस्थिति इसे विशेष धार्मिक पहचान देती है.

सातवीं शताब्दी की मानी जाती है कुबेर प्रतिमा
मंदिर का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका पुरातात्विक इतिहास भी काफी पुराना है. पुरातत्व विभाग के डॉ. कैलाश शर्मा के अनुसार, श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर लगभग 1200 वर्ष पुराना है. यहां स्थापित भगवान कुबेर की प्रतिमा उत्तर गुप्तकाल की यानी सातवीं शताब्दी की मानी जाती है. मराठाकाल में मंदिर के निर्माण और जीर्णोद्धार के दौरान इस प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित किया गया था.

तीन फीट ऊंची प्रतिमा में नेवले पर विराजमान हैं कुबेर
भगवान कुबेर की प्रतिमा करीब तीन फीट ऊंची है. इसमें उन्हें बड़े उदर और चार भुजाओं के साथ नेवले पर विराजमान दिखाया गया है. उनके एक हाथ में धन की थैली और दूसरे हाथ में प्याला है. मंदिर में भगवान गणेश और माता पार्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. वर्ष 1978 में इस प्रतिमा की पहचान भगवान कुबेर के रूप में की गई थी.

मंदिर की मूल संरचना में बदलाव की अनुमति नहीं
धौलागढ़ महादेव मंदिर को लेकर एक मान्यता यह भी प्रचलित है कि यह मंदिर उड़कर यहां आया था और इसकी कोई नींव नहीं है. मंदिर के प्राचीन और पुरातात्विक महत्व को देखते हुए इसकी मूल संरचना में बदलाव नहीं किया जा सकता. मराठाकाल में इसका जीर्णोद्धार कराया गया था. इस तरह मंदिर में धार्मिक आस्था के साथ इतिहास और पुरातत्व की विरासत भी जुड़ी हुई है. धनतेरस पर भगवान कुबेर के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु इसे मंदसौर की विशिष्ट धार्मिक पहचान बनाते हैं.
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Author: Vindhya Times
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