MP News : मध्यप्रदेश सरकार ने लागू की सख्त निति! खुला बोरवेल छोड़ा तो होगी जेल और FIR
MP News :मध्यप्रदेश सरकार ने बोरवेल हादसों को रोकने और ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई बोरवेल नीति और SOP लागू कर दी है. आब बिना अनुमति बोरवेल खोदना या खुला बोरवेल छोड़ना भारी पद सकता है. नए नियमों में जुरमाना, जेल और FIR तक का प्रावधान किया गया है.
बोरवेल खोदने से पहले लेना होगी अनुमति
नई नीति के तहत अब किसी भी व्यक्ति को बोरवेल खोदने से पहले रजिस्ट्रेशन और अनुमति लेनी होगी. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य रहेगा. आवेदन मिलने के बाद सम्बंधित अधिकारी स्थानीय स्तर पर जांच कर रिपोर्ट तैयार करेगे. सरकार का कहना है की इससे अनियोजित और असुरक्षित बोरवेल खुदाई पर रोक लगेगी.
90 दिन के अंदर बंद करना होगा सुखा बोरवेल
अगर बोरवेल में पानी नहीं निकलता है या वह असफल हो जाता है तो उसे खुला नहीं छोड़ा जा सकेगा. ज़मीन मालिक को 90 दिन के अंदर बोरवेल को मिट्टी या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा. इसकी फोटो पोर्टल पर अपलोड करना भी ज़रूरी होगा. नियम का पालन न करने पर करवाई की जाएगी.
लापरवाही पर जुर्माना और जेल का प्रावधान
सरकार ने लापरवाही करने वालो के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. खुला बोरवेल मिलने पर पहेली बार 10 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा. वहीँ दूसरी बार पकडे जाने पर 25 हज़ार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है. गंभीर स्थिति में जेल की करवाई भी की जा सकती है.
हादसा होने पर दर्ज होगी सीधी FIR
नए नियमों के मुताबिक अगर किसी खुले बोरवेल की वजह से हादसा होता है तो ज़मीन मालिक और DRILLING एजेंसी को ज़िम्मेदार माना जायेगा दोनों के खिलाफ सीधे FIR दर्ज की जाएगी इसके अलावा रेस्क्यू ऑपरेशन में होने वाला लाखों रुपये का खर्च भी उन्ही से वसूल किया जायेगा. सरकार का मानना है की इससे लापरवाही में कमी आएगी.
PARAKH APP के माध्यम से कर सकते हैं शिकायत
आम नागरिक भी अब खुले बोरवेल की जानकारी सीधे प्रशासन तक पंहुचा सकेंगे. इसके लिए PARAKH app का उपयोग कर सकते है. शिकायत मिलने के बाद सम्बंधित विभाग को जांच कर आवश्यक करवाई करनी होगी.
पेयजल सुविधा सुधरने पर भी जोर
नई SOP सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है. बल्कि पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर देती है. जिन गांवों में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं है, वहां नए हैंडपंप और बोरवेल को प्राथमिकता दी जाएगी. पानी की गुणवत्ता की जांच के बाद ही उसे लोगों के उपयोग के लिए शुरू किया जायेगा.
कई हादसों के बाद सरकार ने किया फैसला
पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश के कई जिलों में बच्चों के बोरवेल में गिरने की दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं. कई मामलों में लम्बी रेस्क्यू प्रक्रिया के बावजूद की जान नहीं बाच सकी. इन्ही घटनाओं को देखते हुए सरकार ने नियमों को और सख्त बनाने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके.
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Author: Vindhya Times
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