Special Story: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में अनोखी परंपरा, हिर्री गांव में रावण का पुतला नहीं, बल्कि किया जाता है वध

Special Story: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में अनोखी परंपरा, हिर्री गांव में रावण का पुतला नहीं, बल्कि किया जाता है वध

Special Story: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में अनोखी परंपरा, हिर्री गांव में रावण का पुतला नहीं, बल्कि किया जाता है वध

Special Story: देशभर में जहां विजयादशमी के पावन पर्व पर रावण के बड़े-बड़े पुतले जलाने की परंपरा है, वहीं छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम हिर्री में दशहरा मनाने की एक बेहद अनूठी और अलग परंपरा वर्षों से चली आ रही है, इस गांव में रावण का पुतला दहन करने के बजाय पारंपरिक रूप से उसका वध किया जाता है, ग्रामीण इसी अनोखी सांस्कृतिक परंपरा के साथ तीन दिवसीय भव्य दशहरा उत्सव का आयोजन करते हैं, जो न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए भी मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है, पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं.

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तीन दिवसीय भव्य आयोजन

ग्राम हिर्री में इस वर्ष भी दशहरा उत्सव को लेकर तैयारियां पूरे उत्साह के साथ जोरों पर चल रही हैं, उत्सव के पहले दिन रविवार की संध्या बेला में ग्रामदेवी मां शीतला सहित क्षेत्र के सभी देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर इस तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ किया जाएगा, तय कार्यक्रम के मुताबिक, आयोजन के पहले दिन भगवान राम के जन्म प्रसंग, दूसरे दिन ऐतिहासिक बाली-सुग्रीव युद्ध और तीसरे तथा अंतिम दिन रामलीला के माध्यम से रावण वध का जीवंत मंचन किया जाएगा, पारंपरिक रूप से रावण का पुतला सजाने और तैयार करने की जिम्मेदारी स्थानीय कलाकार रामचंद्र राना द्वारा निभाई जाती है.

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अंतिम दिन सीता अग्नि परीक्षा

दशहरा उत्सव के अंतिम दिन रावण वध के पश्चात माता सीता की अग्नि परीक्षा और लंकापति विभीषण के राजतिलक का मंचन किया जाएगा, इसके बाद एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की सुंदर प्रस्तुति दी जाएगी, इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पुतला दहन न होने के कारण पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याएं भी उत्पन्न नहीं होती हैं, इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाने में सरपंच सुकमन मरकाम, उपसरपंच घुमेश्वर साहू, पारेश्वर वैद्य, चंद्रस्वरूप साहू, भारद्वाज वैद्य, मोहन भंडारी, भुवन शार्दूल, करण सिंह, प्रशांत मरकाम, देवेंद्र तिवारी, रामपवन यादव, हेमंत साहू, फूलसिंह वैद्य सहित क्षेत्र के सभी गायता-पुजारी, पंचगण और समस्त ग्रामवासी पूरी तन्मयता से जुटे हुए हैं.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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