Satna News: नागौद के पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का निधन, लंबे समय से थे अस्वस्थ

Satna News: नागौद के पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का निधन, लंबे समय से थे अस्वस्थ

Satna News: नागौद के पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का निधन, लंबे समय से थे अस्वस्थ

Satna News: सतना जिले के नागौद क्षेत्र के पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता यादवेंद्र सिंह का शनिवार दोपहर 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे और भोपाल के चिरायु अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। रविवार को उनके गृह ग्राम कचनार में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन से क्षेत्र में शोक का माहौल है।

भोपाल में चल रहा था इलाज     

यादवेंद्र सिंह पिछले काफी समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनका उपचार भोपाल के चिरायु अस्पताल में चल रहा था। जानकारी के अनुसार उनकी हार्ट बाईपास सर्जरी हो चुकी थी और वे पिछले एक वर्ष से हाई डायबिटीज से पीड़ित थे। हाल ही में उनकी स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों को उनका एक पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा था। स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के बीच शनिवार को उनका निधन हो गया।

सरपंच से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

यादवेंद्र सिंह का जन्म 5 जून 1953 को सतना जिले के कचनार गांव में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1978 में वसुधा ग्राम पंचायत के सरपंच के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। सरपंच चुनाव में उन्होंने जुगुल किशोर बागरी (दिवंगत पूर्व मंत्री) को पराजित किया था और लगातार 10 वर्षों तक इस पद पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न सहकारी और प्रशासनिक पदों पर भी जिम्मेदारी संभाली।

सहकारी और मंडी संस्थाओं में निभाई जिम्मेदारी

वर्ष 1992 में वे विपणन सहकारी समिति नागौद के अध्यक्ष बने। 1993 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा देकर जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष का दायित्व संभाला। वर्ष 1998-99 में वे कृषि उपज मंडी नागौद के अध्यक्ष बने और लगभग पांच वर्षों तक इस पद पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई।

विधानसभा चुनावों में उतार-चढ़ाव भरा सफर

यादवेंद्र सिंह ने वर्ष 2003 और 2008 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2013 में कांग्रेस ने उन्हें पुनः उम्मीदवार बनाया और वे विधायक निर्वाचित हुए। उन्होंने पांच वर्षों तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2018 के चुनाव में वे करीब 1200 वोटों से पराजित हुए। 2023 में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उन्होंने बसपा से चुनाव लड़ा और लगभग 52 हजार वोट प्राप्त किए, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके।

2024 में भाजपा में हुए शामिल

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। अपने राजनीतिक जीवन में वे विभिन्न दलों से जुड़े रहे, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पहचान बनी रही। अपने सार्वजनिक जीवन में वे स्पष्ट वक्ता और सक्रिय नेता के रूप में जाने जाते थे।

इन नेताओं से रहा करीबी संबंध

यादवेंद्र सिंह को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह और उनके पुत्र अजय सिंह राहुल के करीबी नेताओं में गिना जाता था। मंचीय कार्यक्रमों से लेकर विधानसभा सत्रों तक वे अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली वाणी के लिए पहचाने जाते थे। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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