Rewa News: रीवा के कॉलेजों में एडमिशन संकट, खाली सीटों ने बढ़ाई उच्च शिक्षा विभाग की चिंता

Rewa News: रीवा के कॉलेजों में एडमिशन संकट, खाली सीटों ने बढ़ाई उच्च शिक्षा विभाग की चिंता

Rewa News: रीवा के कॉलेजों में एडमिशन संकट, खाली सीटों ने बढ़ाई उच्च शिक्षा विभाग की चिंता

Rewa News: रीवा के सरकारी कॉलेजों में इस बार एडमिशन को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है. कई कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं और छात्र दूसरे शहरों की ओर रुख कर रहे हैं. कभी जिन कॉलेजों में प्रवेश के लिए लंबी कतारें लगती थीं, आज वहां छात्रों की कमी चिंता का कारण बन गई है. उच्च शिक्षा विभाग के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है.

बड़े कॉलेज भी नहीं भर पाए सीटें

रीवा के प्रमुख कॉलेजों में भी एडमिशन की स्थिति बेहतर नहीं रही. पीएमश्री एक्सीलेंस कॉलेज, टीआरएस कॉलेज और जीडीसी जैसे संस्थानों में सीटों की संख्या कम करने के बाद भी कई सीटें खाली रह गईं. छात्रों का रुझान अब पारंपरिक कोर्स जैसे बीए, बीएससी और बीकॉम की जगह तकनीकी और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रमों की ओर ज्यादा बढ़ रहा है.

कॉलेजों की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

जानकारों का कहना है कि कॉलेजों में पढ़ाई का माहौल कमजोर होने और शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों का भरोसा कम हो रहा है. कई जगह नियमित कक्षाएं संचालित नहीं होने और संसाधनों की कमी का असर भी दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि आर्थिक रूप से सक्षम छात्र रीवा में रुकने की जगह भोपाल, इंदौर और दिल्ली जैसे शहरों में प्रवेश लेना पसंद कर रहे हैं.

12वीं पास छात्रों के पलायन पर चिंता

इस वर्ष मप्र बोर्ड और सीबीएसई से बड़ी संख्या में छात्र 12वीं पास हुए, लेकिन सरकारी कॉलेजों में उपलब्ध सीटें पूरी तरह नहीं भर पाईं. रीवा जिले में करीब 19 हजार सीटों के बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रहना सवाल खड़े करता है. अधिकारियों और शिक्षा विशेषज्ञों के सामने अब यह चुनौती है कि छात्रों को वापस सरकारी कॉलेजों की ओर कैसे आकर्षित किया जाए.

उच्च शिक्षा में सुधार की जरूरत

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, बेहतर संसाधन और नियमित निगरानी की जरूरत है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते बदलाव नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में कई कॉलेजों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है. फिलहाल एडमिशन प्रक्रिया खत्म होने के बाद भी खाली सीटों को देखते हुए अतिरिक्त समय देने पर विचार किया जा सकता है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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