National News: भारत में 52 साल में 40% बढ़ा लू का दायरा, MP समेत इन राज्यों पर सबसे ज्यादा असर
National News: वैश्विक तापमान में लगातार बढ़ोतरी और मौसम के बदलते पैटर्न के बीच भारत में हीटवेव का असर तेजी से बढ़ रहा है. उपलब्ध अध्ययनों और मौसम संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, 1970 के दशक की तुलना में देश में लू के प्रभाव वाले भौगोलिक क्षेत्र में करीब 40 फीसदी की वृद्धि हुई है. इसका असर खास तौर पर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में देखने को मिल रहा है.
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उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत बने हॉटस्पॉट
पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बड़े मैदानी इलाकों में गर्मी के लंबे दौर देखने को मिल रहे हैं. पहले जहां लू का असर सीमित अवधि तक रहता था, वहीं अब मार्च और अप्रैल से ही कई क्षेत्रों में लंबे गर्मी के दौर शुरू होने लगे हैं. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों में भी सामान्य से अधिक तापमान की घटनाएं सामने आ रही हैं.
ग्लोबल वार्मिंग और शहरीकरण का असर
पिछले पांच दशकों से अधिक के आंकड़ों के विश्लेषण में हीटवेव के बढ़ते प्रभाव के पीछे वैश्विक तापमान वृद्धि के साथ शहरीकरण को भी महत्वपूर्ण कारक माना गया है. ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि, मौसम संबंधी बदलाव और कुछ वर्षों में अल-नीनो जैसी घटनाएं भी तापमान और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करती हैं. वहीं कंक्रीट का बढ़ता विस्तार, पेड़ों की कमी और जलस्रोतों के घटने से शहरों में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ रहा है.
स्वास्थ्य, खेती और बिजली व्यवस्था पर असर
लगातार बढ़ती गर्मी का प्रभाव स्वास्थ्य के साथ कृषि और बिजली व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. अत्यधिक तापमान के दौरान हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. समय से पहले पड़ने वाली तेज गर्मी गेहूं जैसी रबी फसलों को प्रभावित कर सकती है. वहीं कूलिंग उपकरणों के अधिक इस्तेमाल से गर्मियों में बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ती है.
हीट एक्शन प्लान को प्रभावी बनाने की जरूरत
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए लंबे समय की तैयारी जरूरी है. राज्यों और स्थानीय प्रशासन को हीट एक्शन प्लान को जिला और स्थानीय स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देना होगा. शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, बेहतर कूलिंग डिजाइन वाले भवनों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल तथा राहत केंद्र जैसी सुविधाएं मजबूत करने से गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है.
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Author: Vindhya Times
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