Rewa News: रीवा में एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान, स्कूल जाने की सड़क नहीं! 100 साल पुराने स्कूल की दर्दनाक कहानी

Rewa News: रीवा में एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान, स्कूल जाने की सड़क नहीं! 100 साल पुराने स्कूल की दर्दनाक कहानी

Rewa News: रीवा में एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान, स्कूल जाने की सड़क नहीं! 100 साल पुराने स्कूल की दर्दनाक कहानी

Rewa News: रीवा में विकास की तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है. शहर में एयरपोर्ट शुरू हो चुका है और हवाई सेवाएं भी चल रही हैं, लेकिन कई जगह बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है. इसका उदाहरण शहर के जिवला इलाके का एक सरकारी स्कूल है, जहां स्कूल की इमारत तो तैयार है, लेकिन वहां पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है. बारिश के दिनों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि बच्चों के साथ शिक्षकों का स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है.

रीवा में एयरपोर्ट पहुंचना आसान, 100 साल पुराने स्कूल तक रास्ता नहीं, 36  बच्चे पढ़ाई से

100 साल पुराना है सरकारी स्कूल

शासकीय प्राथमिक शाला जिवला, मार्तण्ड स्कूल क्रमांक 2 संकुल के अंतर्गत आती है. स्थानीय जानकारी के अनुसार यह स्कूल करीब 100 साल पुराना है और महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव के समय से संचालित होता आ रहा है. इस स्कूल से पढ़कर कई बच्चे आगे बढ़े हैं. समय के साथ स्कूल की पुरानी इमारत का जीर्णोद्धार भी हुआ और अब यहां पक्की बिल्डिंग सहित कई सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन स्कूल तक पहुंचने का रास्ता आज भी सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है.

36 बच्चों का भविष्य रास्ते के इंतजार में

स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक कुल 36 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें 18 छात्र और 18 छात्राएं शामिल हैं. बच्चों में पढ़ने की इच्छा है, लेकिन स्कूल तक पहुंचना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. उन्हें तालाब की मेड़, नाला और खेतों की पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है. इसके बाद कई जगह कंटीले तारों को पार करके स्कूल तक पहुंचना पड़ता है. बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ और पानी भर जाने से यह सफर और मुश्किल हो जाता है.

स्कूल पर खर्च हुआ, रास्ते का समाधान नहीं

स्कूल परिसर में पंचायत की ओर से कई विकास कार्य कराए गए हैं. परिसर में पेवर ब्लॉक सहित दूसरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन मुख्य मार्ग से स्कूल तक पहुंचने का रास्ता अब तक नहीं बन पाया है. आसपास की जमीन निजी होने के कारण रास्ते के लिए जमीन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बनी हुई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक जमीन की कीमत काफी ज्यादा है, इसलिए सड़क के लिए जमीन मिलना आसान नहीं है.

शिक्षक भी झेल रहे परेशानी

स्कूल तक पहुंचने में सिर्फ बच्चों को ही परेशानी नहीं होती, बल्कि शिक्षकों को भी हर दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. मुख्य मार्ग से स्कूल तक पहुंचने के लिए आसपास के खेतों की मेड़ का सहारा लेना पड़ता है. स्कूल में पदस्थ एक महिला शिक्षक दिव्यांग हैं, उनके लिए बारिश के मौसम में यहां पहुंचना और भी कठिन हो जाता है. स्कूल प्रबंधन की ओर से सड़क की मांग को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ. रास्ते की समस्या के कारण धीरे-धीरे छात्र संख्या कम होने और अभिभावकों के बच्चों को स्कूल भेजने से हिचकने की स्थिति भी सामने आ रही है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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