Special Story: शहडोल के जंगल में डायन माता और खूनी माता का धाम, लाल कपड़ों में बंधे हजारों नारियल, अनोखी है मान्यता

Special Story: शहडोल के जंगल में डायन माता और खूनी माता का धाम, लाल कपड़ों में बंधे हजारों नारियल, अनोखी है मान्यता

Special Story: शहडोल के जंगल में डायन माता और खूनी माता का धाम, लाल कपड़ों में बंधे हजारों नारियल, अनोखी है मान्यता

Special Story: मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में घने जंगलों के बीच स्थित एक अनोखा देवी धाम स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. भैंसाताल गांव के पास मौजूद इस मंदिर में देवी की पूजा डायन माता और खूनी माता के नाम से की जाती है. मंदिर परिसर में लाल कपड़ों में बंधे हजारों नारियल दिखाई देते हैं, जिन्हें श्रद्धालु अपनी मन्नतों के प्रतीक के रूप में बांधकर जाते हैं. स्थानीय मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होने पर भक्त दोबारा मंदिर पहुंचकर नारियल खोलते हैं.

पशुओं की सलामती के लिए शुरू हुई थी पूजा

शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर बुढ़ार जनपद पंचायत के भैंसाताल गांव में यह धाम जंगल के बीच स्थित है. स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक, करीब चार दशक पहले इस इलाके में छोटी-छोटी बस्तियां थीं और लोगों की आजीविका खेती तथा पशुपालन पर निर्भर थी. उस समय जंगल में चरने के लिए जाने वाले पशु अक्सर गायब हो जाते थे. इससे परेशान ग्रामीणों ने एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे प्रार्थना और मन्नत मांगना शुरू किया. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि इसके बाद गुम हुए पशु सुरक्षित मिलने लगे. धीरे-धीरे इस स्थान के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और यहां देवी की पूजा की परंपरा स्थापित हो गई.

लाल कपड़ों में बंधे नारियल हैं धाम की खास पहचान

इस मंदिर की सबसे अलग पहचान यहां दिखाई देने वाले लाल कपड़ों में बंधे हजारों नारियल हैं. श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मंदिर पहुंचते हैं और नारियल को लाल कपड़े में बांधकर परिसर में टांग देते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, मन्नत पूरी होने के बाद भक्त दोबारा धाम में आकर अपना नारियल खोलते हैं. यहां लोग गुम हुए पशुओं का पता लगाने, चोरी हुआ सामान वापस मिलने, संतान प्राप्ति और बच्चों की पढ़ाई में सफलता जैसी कामनाएं लेकर पहुंचते हैं. इन मान्यताओं के चलते मंदिर से जुड़ी परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है.

नवरात्र में दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान इस धाम में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है. शहडोल, अनूपपुर और आसपास के क्षेत्रों से लोग देवी के दर्शन करने और मन्नत मांगने पहुंचते हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार, कुछ श्रद्धालु यहां बलि भी चढ़ाते हैं. जंगल के बीच मंदिर तक पहुंचने में लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए ग्राम पंचायत की ओर से गांव से धाम तक कच्ची सड़क बनवाई गई है. प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर आज भी स्थानीय लोककथाओं, पुरानी परंपराओं और लोगों की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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