CG News: सीएम साय ने शुरू की ‘रेशम से रोशन जशपुर’ योजना, टसर उत्पादन में जिला बना नंबर वन

CG News: सीएम साय ने शुरू की ‘रेशम से रोशन जशपुर’ योजना, टसर उत्पादन में जिला बना नंबर वन

CG News: सीएम साय ने शुरू की ‘रेशम से रोशन जशपुर’ योजना, टसर उत्पादन में जिला बना नंबर वन

CG News: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में रेशम विभाग की महत्वाकांक्षी योजना ‘रेशम से रोशन जशपुर’ का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि इस पहल से जशपुर में टसर और मलबरी रेशम कीटपालन को नई पहचान मिल रही है. वर्ष 2025-26 में जशपुर टसर कोसा उत्पादन में पूरे छत्तीसगढ़ में पहले स्थान पर रहा है.

हजारों किसान योजना से जुड़े

जिले में 1,527.5 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन और विकसित पौधरोपण किया गया है. यहां 66 रेशम उत्पादन केंद्र और 84 कृमिपालन समूह सक्रिय हैं. कुल 1,939 किसान रेशम उत्पादन से जुड़कर स्वरोजगार और अतिरिक्त आमदनी का जरिया बना रहे हैं. टसर कीटों के लिए साजा और अर्जुना प्रमुख खाद्य पौधे हैं.

रेशम से रोशन जशपुर' की शुरुआत, टसर उत्पादन में प्रदेश में जिला अव्वल -  Gurtur Goth Hindi

एक फसल से 1.20 लाख तक आय

करीब 45 से 55 दिनों के कीटपालन के बाद एक किसान को औसतन 15 हजार टसर ककून मिलते हैं. शासन ए ग्रेड ककून को 5,000 रुपए प्रति हजार, बी ग्रेड को 4,150 रुपए और सी ग्रेड को 3,000 रुपए प्रति हजार की दर से खरीदता है. इससे किसानों को प्रति फसल करीब 80 हजार से 1.20 लाख रुपए तक की आय हो सकती है. विभाग स्वस्थ डिम्ब समूह सिर्फ 2 रुपए प्रति समूह की रियायती दर पर उपलब्ध कराने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी देता है.

जशपुर का टसर अब हुनर से रोजगार और रेशम से समृद्धि की नई कहानी बुन रहा है।  वर्ष 2025-26 में टसर कोसा उत्पादन में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल ...

उत्पादन में जशपुर की बड़ी उपलब्धि

वर्ष 2025-26 में जिले में 1,21,65,649 कोसा फल का उत्पादन दर्ज किया गया. इसकी बाजार कीमत 72,84,820 रुपए बताई गई है. इसी दौरान 4,69,562 स्वस्थ डिम्ब समूह पालित किए गए. आंकड़े बताते हैं कि रेशम उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय का एक महत्वपूर्ण साधन बन रहा है.

बीज और मलबरी से अतिरिक्त कमाई

टसर बीज उत्पादन योजना के तहत बीजागार निर्माण के लिए 47,500 रुपए और बीज कोसा खरीद के लिए 23,750 रुपए की चक्रीय राशि अनुदान के रूप में दी जा रही है. एक बीज उत्पादक प्रति फसल 4,000 स्वस्थ डिम्ब समूह तैयार कर 10 रुपए प्रति समूह की दर से बेच सकता है. वहीं शहतूत बगान विकसित करने के लिए 5 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जा रहा है. पूर्ण विकसित बगान से किसान सालाना 80 हजार से 1 लाख रुपए तक की अतिरिक्त आय कमा सकता है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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