MP News: नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज, जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा

MP News: नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज, जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा

MP News: नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज, जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा

MP News: मध्य प्रदेश में नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. याचिका में मौजूदा राज्यपाल के पांच साल का कार्यकाल पूरा होने का हवाला देते हुए पद से हटाने और नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग की गई थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि नया राज्यपाल पदभार ग्रहण करने तक मौजूदा राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं.

हाईकोर्ट:'राज्यपाल पद उत्तराधिकारी आने तक खाली नहीं रह सकता', नए गवर्नर की  नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज - The Office Of The Governor Cannot  Remain Vacant ...

रिटायर्ड प्रोफेसर ने दायर की थी याचिका

यह जनहित याचिका जबलपुर के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमए खान की ओर से दायर की गई थी. याचिकाकर्ता का तर्क था कि मौजूदा राज्यपाल का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए उन्हें पद पर नहीं रहना चाहिए. मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच ने की.

PIL की शर्तों को लेकर कोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जनहित याचिका दायर करने की आवश्यक शर्तों का भी उल्लेख किया. अदालत के मुताबिक, जनहित याचिका दायर करने वाले व्यक्ति को अपनी सामाजिक साख, जनहित से जुड़े कार्यों की पृष्ठभूमि और याचिका दाखिल करने की bona fides यानी सद्भावना से जुड़ी जानकारी सामने रखनी होती है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में इन आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया.

अनुच्छेद 156 में कार्यकाल को लेकर क्या प्रावधान है

हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 156(3) का भी हवाला दिया. संविधान में राज्यपाल का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित है, लेकिन प्रावधान यह भी कहता है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यपाल तब तक पद पर बने रह सकते हैं, जब तक उनका उत्तराधिकारी पदभार ग्रहण नहीं कर लेता. इसी संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर अदालत ने याचिका में की गई मांग को स्वीकार नहीं किया.

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी दिया संदर्भ

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के कृष्णा बल्लभ सहाय बनाम जांच आयोग, 1969 मामले का भी उल्लेख किया. अदालत ने उस फैसले के संदर्भ में संवैधानिक पद की निरंतरता के सिद्धांत को सामने रखा. हाईकोर्ट के अनुसार, उत्तराधिकारी के पदभार संभालने तक मौजूदा राज्यपाल का पद पर बने रहना संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप है.

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Author: Vindhya Times

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