CG News: सावन स्पेशल: छत्तीसगढ़ के 8 प्रसिद्ध शिवधाम इतिहास आस्था और यात्रा की पूरी जानकारी

CG News: सावन स्पेशल: छत्तीसगढ़ के 8 प्रसिद्ध शिवधाम इतिहास आस्था और यात्रा की पूरी जानकारी

CG News: सावन स्पेशल: छत्तीसगढ़ के 8 प्रसिद्ध शिवधाम इतिहास आस्था और यात्रा की पूरी जानकारी

CG News: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है, इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिरों में दर्शन और पूजा करने पहुंचते हैं. छत्तीसगढ़ में कई प्राचीन शिवधाम मौजूद हैं, जो अपनी धार्मिक मान्यता, ऐतिहासिक महत्व और शानदार वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं. यहां हम आपको प्रदेश के 8 प्रमुख शिव मंदिरों की जानकारी दे रहे हैं, जहां सावन में भक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिलती है.

मधेश्वर महादेव धाम जशपुर

जशपुर जिले की खूबसूरत मयाली पहाड़ी पर स्थित मधेश्वर महादेव धाम प्राकृतिक शिवलिंग के लिए जाना जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान प्राचीन समय से साधु संतों की तपस्या भूमि रहा है. यहां श्रद्धालुओं के लिए सड़क, सीढ़ियां और अन्य सुविधाओं का विकास किया गया है. प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह शिवधाम अब धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

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भोरमदेव मंदिर कबीरधाम

कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर अपनी अद्भुत शिल्पकला और प्राचीन वास्तुकला के कारण प्रसिद्ध है. इस मंदिर का निर्माण लगभग 11वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है. पत्थरों पर की गई सुंदर नक्काशी और कलात्मक मूर्तियां इसकी सबसे बड़ी विशेषता हैं. इसकी अनोखी कला शैली के कारण इसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है.

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हटकेश्वर महादेव मंदिर रायपुर

रायपुर में खारून नदी के किनारे स्थित हटकेश्वर महादेव मंदिर प्रदेश के पुराने शिव मंदिरों में शामिल है. इस मंदिर का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना माना जाता है और इसे महादेव घाट के नाम से भी जाना जाता है. सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.

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कुलेश्वर महादेव मंदिर राजिम

राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम पर स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है. राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग भी कहा जाता है और यहां आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों में इस मंदिर का विशेष महत्व रहता है. श्रद्धालु दूर दूर से यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर खरौद

खरौद स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने शिव मंदिरों में से एक है. इसका निर्माण 6वीं से 7वीं शताब्दी के बीच माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण ने यहां शिव आराधना कर अपने पापों का प्रायश्चित किया था. इसी वजह से इस मंदिर को लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है.

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जलेश्वर महादेव मंदिर बारसूर

बस्तर क्षेत्र के बारसूर में स्थित जलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है. बारसूर कभी चिंदक नागवंशी राजाओं की राजधानी हुआ करता था. यहां 10वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान कई मंदिरों का निर्माण हुआ, जिनमें जलेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख है. विशाल पत्थरों से बना यह मंदिर बस्तर की पुरानी शैव परंपरा को दर्शाता है.

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भूतेश्वर महादेव गरियाबंद

गरियाबंद क्षेत्र में स्थित भूतेश्वर महादेव प्राकृतिक रूप से बने विशाल शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है. यह किसी राजा द्वारा निर्मित मंदिर नहीं है, बल्कि यहां स्वयंभू शिवलिंग मौजूद है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यह शिवलिंग समय के साथ आकार में बढ़ता जा रहा है. अपनी अनोखी विशेषता के कारण यह स्थान देशभर के शिव भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

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जलेश्वर धाम गौरेला पेंड्रा मरवाही

जलेश्वर धाम का इतिहास लगभग 800 से 900 वर्ष पुराना माना जाता है. यह मंदिर कलचुरी काल से जुड़ा हुआ माना जाता है और लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. मंदिर परिसर में मौजूद प्राकृतिक जलकुंड इसकी खास पहचान है. मान्यता है कि इस जलकुंड का पानी कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होता, इसलिए यहां भक्तों की विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है.

जलेश्वर धाम | जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़ शासन | भारत

छत्तीसगढ़ के शिवधामों की खासियत

छत्तीसगढ़ के ये सभी शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ साथ इतिहास और संस्कृति की अनमोल विरासत को भी दर्शाते हैं. सावन के पवित्र महीने में इन मंदिरों में दर्शन करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव मिलता है. अगर आप प्रकृति, इतिहास और भक्ति का संगम देखना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ के ये शिवधाम आपकी यात्रा के लिए बेहतरीन स्थान साबित हो सकते हैं.

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Author: Vindhya Times

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