CG News: छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण, धान के बदले खेती करने पर किसानों को मिलेगा प्रति एकड़ 15,000 रुपये का अनुदान
CG News: छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और पारंपरिक धान की खेती पर निर्भरता को कम करने के लिए फसल विविधीकरण को तेजी से बढ़ावा दे रही है. इसके अंतर्गत किसानों को धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और कोदो, कुटकी व रागी जैसे मिलेट्स यानी श्रीअन्न की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है. राज्य में इन निर्धारित वैकल्पिक फसलों को उगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का आकर्षक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है. इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को अधिक लाभकारी बनाना और किसानों को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करना है.

अधिकारियों की समीक्षा बैठक और धीमी प्रगति पर नाराजगी
हाल ही में कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने रायपुर संभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की है, इस बैठक के दौरान उन्होंने फसल विविधीकरण योजना की धीमी रफ्तार पर गहरी नाराजगी जाहिर की और संबंधित अधिकारियों को इस अभियान में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कृषि कार्यों को सीधे तौर पर बाजार की आवश्यकताओं से जोड़ना बेहद जरूरी है. अधिकारियों को पूरी कार्ययोजना बनाकर इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने को कहा गया है.

हर जिले में विकसित होंगे दो से तीन विशेष कृषि मॉडल
किसानों को सही दिशा दिखाने और सफल प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जिले में दो से तीन विशिष्ट कृषि मॉडल विकसित किए जाएंगे, इन मॉडलों का चयन करते समय स्थानीय मिट्टी की गुणवत्ता, जलवायु, उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और वर्तमान बाजार की मांग को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा. इस रणनीति का मुख्य लक्ष्य किसानों को व्यावहारिक रूप से ऐसी फसलों की खेती सिखाना है जिनकी बाजार में भारी डिमांड हो और जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके. इससे क्षेत्रीय स्तर पर कृषि के क्षेत्र में नए और सफल आयाम स्थापित किए जा सकेंगे.

उत्पादन से लेकर विपणन और बाजार तक किसानों को पूरी मदद
सरकार की इस योजना के तहत किसानों को केवल फसल उत्पादन तक ही सीमित सहायता नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें पूरी प्रक्रिया में सहयोग प्रदान किया जाएगा, इसमें सही फसल का चयन करने से लेकर उन्नत उत्पादन तकनीक और विपणन यानी मार्केटिंग तक के सभी पहलू शामिल हैं. स्थानीय भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों के अनुकूल फसलों का चयन करने से किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी. इसके अलावा, आगामी 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी की तैयारियों और खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए ‘साथी पोर्टल’ के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है.
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किसानों के लिए क्या है खास और महत्वपूर्ण बातें
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए धान के बजाय निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर मिलने वाला 15 हजार रुपये प्रति एकड़ का अनुदान एक बहुत बड़ा अवसर है, हालांकि, अपनी पारंपरिक खेती की पद्धति को बदलने से पहले किसानों को कृषि विभाग से संपर्क करके अपनी पात्रता, स्वीकृत फसलों की सूची और सभी जरूरी शर्तों की पूरी जानकारी जरूर प्राप्त कर लेनी चाहिए. सही योजना और सरकारी मदद के साथ खेती करने से किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं और कृषि को अधिक टिकाऊ बना सकते हैं.
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Author: Vindhya Times
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