Rewa News: रीवा-मऊगंज में 4 महीने से अटकी पोषण आहार की राशि, स्व सहायता समूहों पर बढ़ा कर्ज

Rewa News: रीवा-मऊगंज में 4 महीने से अटकी पोषण आहार की राशि, स्व सहायता समूहों पर बढ़ा कर्ज

Rewa News: रीवा-मऊगंज में 4 महीने से अटकी पोषण आहार की राशि, स्व सहायता समूहों पर बढ़ा कर्ज

Rewa News: रीवा और मऊगंज जिले में प्रधानमंत्री पोषण आहार कार्यक्रम से जुड़े स्व सहायता समूहों और एजेंसियों को पिछले तीन से चार महीने से भुगतान नहीं मिला है. राशि जारी नहीं होने के कारण मध्याह्न भोजन की व्यवस्था संभालने वाली ग्रामीण महिलाओं और समूहों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. समूह संचालकों के सामने बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था जारी रखना भी चुनौती बनता जा रहा है.

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किराना दुकानों पर बढ़ा कर्ज

समूह संचालकों का कहना है कि समूहों के लिए मिलने वाली राशि पहले ही काफी कम है. प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के हिसाब से 8 से 10 रुपए के बीच राशि जारी की जाती है. इसके बावजूद पिछले चार महीनों से भुगतान नहीं होने के कारण किराना दुकानों का उधार लगातार बढ़ता जा रहा है. भोजन तैयार करने के लिए जरूरी सामान उधार में लेना पड़ रहा है, जबकि अब कई दुकानदार भी आगे सामान देने से इनकार करने लगे हैं.

30 से 50 हजार रुपए तक पहुंचा कर्ज

समूह संचालकों के मुताबिक लगातार भुगतान अटकने से कई समूहों पर 30 से 50 हजार रुपए तक का कर्ज हो गया है. प्राथमिक स्कूल स्तर के समूहों पर करीब 30 हजार रुपए और माध्यमिक स्तर के समूहों पर करीब 50 हजार रुपए तक का कर्ज होने की बात सामने आई है. समूह संचालकों के लिए इस कर्ज को चुकाना बड़ी समस्या बनता जा रहा है.

खाद्यान्न मिल रहा, लेकिन राशि का भुगतान नहीं

समूहों को उच्च स्तर से खाद्यान्न का आवंटन तो किया जा रहा है, लेकिन उसकी राशि का भुगतान नहीं होने की शिकायत है. इसके कारण मध्याह्न भोजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीद के लिए समूह संचालकों को अपनी ओर से व्यवस्था करनी पड़ रही है. स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था बनाए रखना भी मुश्किल होता जा रहा है.

समूहों के सामने बढ़ती जा रही परेशानी

रीवा और मऊगंज जिले में संचालित करीब 2010 स्व सहायता समूह इस व्यवस्था से जुड़े बताए गए हैं. लगातार भुगतान नहीं होने से इन समूहों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. समूह संचालकों का कहना है कि यदि लंबित राशि का जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो किराना दुकानों से सामान लेना और स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था बनाए रखना और मुश्किल हो सकता है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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