Rewa News: प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस रीवा में “वैदिक साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” पर हुआ गुणवत्ता संवर्धन व्याख्यान
Rewa News: रीवा के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय में बुधवार को “वैदिक साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर गुणवत्ता संवर्धन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा किया गया, जिसमें विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रो. देवेंद्र प्रसाद मिश्र, महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रवीन्द्रनाथ तिवारी, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. शिवकुमार दुबे और प्रकोष्ठ संयोजक डॉ. केशरकली तिवारी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत गुलाब के पौधे भेंट कर किया गया। इसके बाद छात्राओं सौम्या तिवारी और नैन्सी सिंह ने संस्कृत स्वागत गीत प्रस्तुत कर माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।

भारतीय संस्कृति और वेदों की महत्ता पर चर्चा
डॉ. केशरकली तिवारी ने स्वागत उद्बोधन में भारतीय संस्कृति में अतिथि सत्कार की परंपरा और वेदों को ज्ञान का मूल स्रोत बताया। वहीं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. शिवकुमार दुबे ने कर्म, पाप और प्रायश्चित की महत्ता को समझाते हुए वैदिक ज्ञान की वर्तमान समय में उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
“संस्कृत आत्मा की भाषा है” – प्रो. मिश्र
मुख्य वक्ता प्रो. देवेंद्र प्रसाद मिश्र ने अपने व्याख्यान में साहित्य और संस्कृत भाषा की महत्ता को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि “अंधकार है वहाँ जहाँ आदित्य नहीं है, अंधा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।” उन्होंने संस्कृत को आत्मा की भाषा बताते हुए कहा कि ज्ञान का वास्तविक स्वरूप सत्य का बोध कराना है, उन्होंने यह भी बताया कि मूल रूप से वेद एक ही था, जिसे महर्षि वेदव्यास ने लोककल्याण के लिए चार भागों में विभाजित किया। प्रो. मिश्र ने महर्षि मनु और अभिनवगुप्त के विचारों का उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता को रेखांकित किया।
भारतीय ज्ञान परंपरा दुनिया को दिखाएगी राह
कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्राचार्य प्रो. रवीन्द्रनाथ तिवारी ने कहा कि मनुष्य ही कर्म करने वाली सर्वोत्तम योनि है और आने वाले समय में भारतीय ज्ञान परंपरा पूरी दुनिया को नई दिशा देने का सामर्थ्य रखती है, कार्यक्रम का संचालन डॉ. भारतेन्दु मिश्र ने किया, जबकि अंत में डॉ. प्रीति विश्वकर्मा ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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Author: Vindhya Times
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