Rewa News: बीहर नदी का रिवर फ्रंट बाढ़ में तबाह, अधूरी प्लानिंग पर उठे सवाल
Rewa News: रीवा में गुजरात के साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर बीहर नदी के किनारे विकसित किए जा रहे रिवर फ्रंट को हालिया बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है. विक्रम पुल से राजघाट तक तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट के लिए सरकारी जमीन के पुनर्घनत्वीकरण से राशि जुटाई गई थी. निर्माण के दौरान कुछ निजी जमीनों का अधिग्रहण भी किया गया और पचमठा धाम के जीर्णोद्धार का काम कराया गया. प्रोजेक्ट का काम अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि तेज बाढ़ ने कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा दिया.

बाढ़ से निर्माण पर उठे सवाल
रिवर फ्रंट के कई हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब इसकी निर्माण योजना और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. जिस क्षेत्र में यह परियोजना विकसित की गई, वह बीहर नदी के निचले हिस्से में आता है. ऐसे में नदी का जलस्तर बढ़ने पर यहां बने निर्माण को नुकसान पहुंचने की आशंका पहले से थी. इसके बावजूद बाढ़ से बचाव के लिए जरूरी काम पूरे हुए बिना निर्माण आगे बढ़ाने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. अब मौके पर क्षतिग्रस्त ढांचे और रिवर फ्रंट का नाम लिखे हिस्से ही नजर आ रहे हैं.
नदी गहरीकरण का काम भी अधूरा
बताया जा रहा है कि रिवर फ्रंट के साथ बीहर नदी के गहरीकरण की योजना भी तैयार की गई थी. विक्रम पुल के पास मौजूद चट्टानी हिस्से के कारण नदी का बहाव तेज होने की बात कही जा रही थी. योजना के अनुसार नदी के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए इस हिस्से में गहरीकरण किया जाना था, लेकिन यह काम पूरा नहीं हो सका. ऐसे में बाढ़ के दौरान तेज बहाव ने नदी किनारे बने निर्माण पर अतिरिक्त दबाव डाला और नुकसान बढ़ गया.
सड़कों और दूसरे निर्माण पर भी असर
बाढ़ का असर सिर्फ रिवर फ्रंट तक सीमित नहीं रहा. रीवा शहर और ग्रामीण इलाकों में कई जगह जलभराव और सड़क क्षति की स्थिति सामने आई है. कई मार्गों पर पानी का तेज बहाव देखने को मिला, जिससे सड़कें, पुल और पुलियों की गुणवत्ता तथा डिजाइन को लेकर भी सवाल उठे हैं. कुछ जगहों पर ड्रेनेज व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने से बारिश का पानी तेजी से जमा हुआ. इससे शहर के विकास कार्यों में आपदा प्रबंधन और जल निकासी की योजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
अब जवाबदेही तय करने की मांग
रिवर फ्रंट के नुकसान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे प्रोजेक्ट को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए पर्याप्त योजना क्यों नहीं बनाई गई. क्या नदी गहरीकरण और जल निकासी से जुड़े काम पहले पूरे किए जाने चाहिए थे, यह भी जांच का विषय है. अब प्रशासन और जिम्मेदार विभागों से निर्माण की तकनीकी योजना, बाढ़ सुरक्षा और खर्च की समीक्षा की मांग उठ रही है. बाढ़ ने रीवा के विकास कार्यों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि भविष्य में किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले प्राकृतिक परिस्थितियों और आपदा जोखिम को कितना ध्यान में रखा जाता है.
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Author: Vindhya Times
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