Sidhi News: सीधी में प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले वायरल हुई वॉट्सएप चैट, कर्मचारियों से पैसे मांगने के आरोप

Sidhi News: सीधी में प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले वायरल हुई वॉट्सएप चैट, कर्मचारियों से पैसे मांगने के आरोप

Sidhi News: सीधी में प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले वायरल हुई वॉट्सएप चैट, कर्मचारियों से पैसे मांगने के आरोप

Sidhi News: मध्यप्रदेश के सीधी जिले में प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल के प्रस्तावित दौरे से पहले एक कथित वॉट्सएप चैट वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. वायरल चैट में मझौली जनपद पंचायत के एक सब इंजीनियर और एसडीओ पर ग्राम रोजगार सहायकों तथा सचिवों से 3-3 हजार रुपए मांगने का आरोप लगाया गया है. दावा किया जा रहा है कि यह राशि मंत्री के दौरे की व्यवस्थाओं के लिए मांगी गई थी. हालांकि अधिकारियों और प्रभारी मंत्री ने इन आरोपों से इनकार किया है. मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विकास मिश्रा ने जांच के आदेश दिए हैं.

वायरल चैट में लगाए गए पैसे मांगने के आरोप

वायरल चैट के अनुसार मझौली जनपद पंचायत के सब इंजीनियर ए.के. दीपांकर ने ग्राम रोजगार सहायकों से 3 हजार रुपए जमा करने के लिए कहा. आरोप है कि एसडीओ सरिता सिंह ने भी राशि जल्द जमा कराने के निर्देश दिए. दावा किया गया कि परसिली, चमराडोल, नौढ़िया, कर्माई सहित करीब 10 ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों से यह राशि मांगी गई.

अधिकारियों ने आरोपों से किया इनकार

एसडीओ सरिता सिंह ने कहा कि किसी कर्मचारी से अवैध वसूली नहीं की गई है. उनके अनुसार जनपद का ऑडिट कार्य लंबित है और जिले की रैंकिंग सुधारने के उद्देश्य से कंसल्टेंसी एजेंसी के माध्यम से कुछ कार्य कराए जाने की योजना थी. इसी के लिए राशि एकत्र करने की बात कही गई थी. वहीं सब इंजीनियर ने भी कंसल्टेंसी एजेंसी के लिए राशि मांगने की बात स्वीकार की, लेकिन यह भी बताया कि अभी तक किसी एजेंसी का चयन नहीं हुआ है.

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

मामला सामने आने के बाद कलेक्टर विकास मिश्रा ने पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं. जिला जनसंपर्क कार्यालय ने भी स्पष्ट किया है कि प्रभारी मंत्री के दौरे का पूरा खर्च जिला सत्कार मद से नियमानुसार किया जाएगा. किसी भी कर्मचारी या अधिकारी से किसी प्रकार की राशि लेने के निर्देश नहीं दिए गए हैं, प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी व्यवस्था के लिए किसी कर्मचारी से पैसे नहीं मांगे गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक साजिश के तहत फैलाया जा रहा मामला है. मंत्री ने कहा कि पूर्व के सरकारी दौरों में भी किसी कर्मचारी से इस तरह की राशि नहीं ली गई थी और इस बार भी ऐसा कुछ नहीं हुआ है.

सोशल ऑडिट को लेकर भी उठे सवाल

रिटायर्ड जनपद पंचायत सीईओ श्रीनिवास द्विवेदी ने कहा कि किसी भी ऑडिट का ठेका नहीं दिया जाता. उन्होंने बताया कि सोशल ऑडिट के लिए भोपाल स्तर से कंसल्टेंसी टीम का चयन होता है, जो ग्राम पंचायतों में जाकर कार्यों का मूल्यांकन करती है. उन्होंने यह भी कहा कि सोशल ऑडिट का जिले की रैंकिंग सुधारने से कोई सीधा संबंध नहीं होता. फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

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Author: Vindhya Times

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