MP News: जबलपुर में 443 करोड़ वसूली मामले में बढ़ीं विधायक संजय पाठक की मुश्किलें
MP News: विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़े खनन प्रकरण में 443 करोड़ रुपये की वसूली को लेकर मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। जबलपुर कलेक्टर न्यायालय ने संबंधित फर्मों को अंतिम नोटिस जारी कर जवाब देने और राशि जमा करने का आखिरी अवसर दिया है।
लंबे समय से लंबित है करोड़ों की वसूली का मामला
खनन से जुड़े इस बड़े प्रकरण में लंबे समय से 443 करोड़ रुपए की राशि जमा नहीं किए जाने को लेकर विवाद बना हुआ है। विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी फर्मों को पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब तक न तो संतोषजनक जवाब दिया गया और न ही राशि जमा की गई। करीब छह महीने से यह मामला लंबित है, जिसके चलते प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। जबलपुर कलेक्टर न्यायालय ने इन फर्मों को समय समाप्ति (फाइनल) नोटिस जारी करते हुए अंतिम अवसर प्रदान किया है।

तीन फर्मों को भेजा गया नोटिस
इस पूरे मामले में तीन प्रमुख फर्मों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें विधायक के परिवार से जुड़ी निर्मला मिनरल्स और आनंद माइनिंग कारपोरेशन शामिल हैं। इसके अलावा तीसरी फर्म पेसिफिक एक्सपोर्टर्स है, जिसके संचालक सुमित अग्रवाल बताए गए हैं। ये फर्में सिहोरा क्षेत्र के विभिन्न गांवों जैसे प्रतापपुर, टिकरिया, दुबियारा और रीठी में खनन कार्य कर रही थीं। जांच में सामने आया कि इन फर्मों द्वारा स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक खनन किया गया है।
अनुमति से अधिक किया गया खनन
खनिज विभाग की जांच में पाया गया कि इन फर्मों ने निर्धारित सीमा से अधिक आयरन ओर का उत्खनन किया। कुल मिलाकर 84 लाख 57 हजार 640 टन अतिरिक्त खनन किया गया, जो नियमों के खिलाफ है। नियमों के अनुसार, किसी भी खदान में खनन के लिए निर्धारित मात्रा और पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होती है। बिना अनुमति या स्वीकृत सीमा से अधिक खनन करना गैरकानूनी माना जाता है। जांच टीम ने सभी दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के आधार पर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर न्यायालय को सौंप दी है।
राज्य स्तरीय जांच में हुआ खुलासा
यह मामला स्थानीय स्तर पर सामने नहीं आ सका था, लेकिन शिकायत मिलने के बाद राज्य स्तरीय जांच समिति ने आठ खदानों की विस्तृत जांच की। इस दौरान वर्ष 2004 से 2017 तक के खनन रिकॉर्ड, उत्पादन आंकड़े, पर्यावरणीय मंजूरी और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा की गई। जांच में स्पष्ट रूप से पाया गया कि फर्मों ने स्वीकृत खदानों से अधिक खनन किया और नियमों का उल्लंघन किया। इसके आधार पर वसूली की राशि तय की गई।
फर्मवार वसूली की बड़ी राशि
जांच के अनुसार अलग-अलग फर्मों पर भारी वसूली तय की गई है। आनंद माइनिंग कारपोरेशन पर लगभग 232 करोड़ रुपये, निर्मला मिनरल्स पर करीब 126 करोड़ रुपये और पेसिफिक एक्सपोर्टर्स पर लगभग 81 करोड़ रुपये की वसूली निर्धारित की गई है। कुल मिलाकर यह राशि 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार रुपये तक पहुंचती है। यह आंकड़ा इस पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाता है और प्रशासन की सख्ती को भी स्पष्ट करता है।
अंतिम निर्णय से पहले आखिरी मौका
कलेक्टर न्यायालय द्वारा जारी अंतिम नोटिस के बाद अब संबंधित फर्मों के पास जवाब देने और राशि जमा करने का आखिरी अवसर है। यदि इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। इस पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। आने वाले समय में कलेक्टर न्यायालय के अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जो इस प्रकरण की दिशा और परिणाम तय करेगा।
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Author: Vindhya Times
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