National News: NEET-UG 2026 पेपर लीक का बड़ा खुलासा! परीक्षा से पहले बिक रहा था सवालों का सेट?
National News: देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। परीक्षा खत्म होने के बाद पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, परीक्षा से पहले ही प्रश्नों का एक बड़ा हिस्सा छात्रों तक पहुंच चुका था। इतना ही नहीं, यह कथित पेपर मोटी रकम लेकर बेचा भी जा रहा था।
राजस्थान SOG की जांच में खुलासा
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। अधिकारियों का दावा है कि कथित गेस पेपर परीक्षा से करीब 15 दिन से लेकर एक महीने पहले तक कई छात्रों के पास पहुंच चुका था। जांच एजेंसियों को ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं, जो बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं।
600 नंबर के सवाल मिलने का दावा
सूत्रों के अनुसार वायरल हुए गेस पेपर में बड़ी संख्या में ऐसे सवाल थे, जो असली परीक्षा से लगभग मेल खाते थे। दावा किया जा रहा है कि करीब 720 अंकों के पेपर में लगभग 600 अंकों के सवाल समान पाए गए। कई सवालों के विकल्पों का क्रम भी कथित तौर पर वही था, जो असली प्रश्न पत्र में मौजूद था, यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां इस मामले को सिर्फ “गेस पेपर” नहीं बल्कि संभावित पेपर लीक मानकर जांच कर रही हैं।
कौन है राकेश मंडावरिया?
जांच में सामने आया कि कथित गेस पेपर सबसे पहले राजस्थान के सीकर जिले के रहने वाले राकेश कुमार मंडावरिया के मोबाइल तक पहुंचा था। वह पिछले कई वर्षों से मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग से जुड़ा काम कर रहा था।
बताया जा रहा है कि वह सीकर में एक ऑफिस चलाता था, जहां MBBS समेत मेडिकल कोर्स में एडमिशन संबंधी सलाह दी जाती थी। फिलहाल जांच एजेंसियां उसके संपर्कों और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं।
केरल से सीकर तक कैसे पहुंचा पेपर?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कथित प्रश्न फाइल एक MBBS छात्र के जरिए भेजी गई थी। छात्र मूल रूप से राजस्थान के चूरू का रहने वाला बताया जा रहा है और फिलहाल केरल में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है।
इसी छात्र के जरिए यह फाइल सबसे पहले मंडावरिया तक पहुंची। इसके बाद यह सामग्री अलग-अलग छात्रों और ग्रुप्स में शेयर की गई या नहीं, इसकी जांच जारी है।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियों को शक है कि प्रश्नों का आदान-प्रदान सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं था। कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल भी किया गया हो सकता है।
कुछ चैट्स में “Forwarded Many Times” जैसे संकेत मिलने की बात भी सामने आई है। अब SOG डिजिटल चैट, कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन की तकनीकी जांच कर रही है।
सीकर फिर बना चर्चा का केंद्र?
राजस्थान का सीकर पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं और कोचिंग नेटवर्क को लेकर चर्चा में रहा है। यहां बड़ी संख्या में मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं।
ऐसे में अगर इस मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है, तो सिर्फ एक व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरे कोचिंग और एडमिशन नेटवर्क पर सवाल उठ सकते हैं।
NTA ने क्या कहा?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने भी मामले पर बयान जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा के दौरान कई स्तरों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए थे, NTA ने कहा कि परीक्षा के चार दिन बाद कथित अनियमितताओं और कदाचार से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। फिलहाल संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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Author: Vindhya Times
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