CG News: जशपुर बना जल संरक्षण का मॉडल, जनभागीदारी से भू-जल संवर्धन को मिली नई ताकत
CG News: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। मनरेगा और जनभागीदारी के सहयोग से जिले में जल संरक्षण की कई अभिनव पहलें की जा रही हैं, जिनका सकारात्मक असर भू-जल स्तर, कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका पर दिखाई दे रहा है।
सोक पिट और ट्रेंच से बढ़ रहा भू-जल पुनर्भरण
जिले में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए घरों, सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। वहीं पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं बारिश के पानी को भूमि में समाहित कर भू-जल स्तर बढ़ाने और मिट्टी कटाव रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आजीविका डबरी से किसानों को मिलेगा फायदा
ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। वर्तमान में 495 आजीविका डबरियां निर्माणाधीन हैं। इन जल संरचनाओं में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी, साथ ही मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

नवा तरिया अभियान से बढ़ी जल भंडारण क्षमता
जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘नवा तरिया’ अभियान भी प्रभावी परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णोद्धार से जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि हुई है। इसका लाभ कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है, जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिल रहा है।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने पर जोर
कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित एक जन आंदोलन है। सभी विभागों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय सहभागिता से आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है, जशपुर में संचालित जल संरक्षण की ये पहलें जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। इससे कृषि उत्पादन बढ़ रहा है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है और पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिल रही है।
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Author: Vindhya Times
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