CG News: धमतरी के उमरगांव में आज भी जीवित है माता पहुंचानी की अनोखी परंपरा, आस्था और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम

CG News: धमतरी के उमरगांव में आज भी जीवित है माता पहुंचानी की अनोखी परंपरा, आस्था और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम

CG News: धमतरी के उमरगांव में आज भी जीवित है माता पहुंचानी की अनोखी परंपरा, आस्था और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम

CG News: छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और आस्था के लिए पूरे देश में खास पहचान रखता है. आधुनिक दौर में जहां कई परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं, वहीं धमतरी जिले का उमरगांव आज भी एक ऐसी अनमोल लोक विरासत को संजोए हुए है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है. यहां हर साल पूरे श्रद्धा भाव से माता पहुंचानी, यानी जुड़वास पर्व, मनाया जाता है.

श्रद्धा के साथ निकली माता पहुंचानी यात्रा

धमतरी जिले के नगरी विकासखंड से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित उमरगांव में इस पारंपरिक पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाया गया. सुबह से ही ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में एकत्र हुए. शीतला माता के पुजारी के नेतृत्व में श्रद्धालु माता सेवा गीत गाते हुए और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन के साथ शोभायात्रा निकालते हुए माता तालाब स्थित मंदिर पहुंचे, मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से शीतला माता की पूजा-अर्चना की. माता को नारियल, फल, फूल, चीला, रोटी और नीम की पत्तियां अर्पित की गईं. ग्रामीणों ने अच्छी बारिश, भरपूर फसल, गांव की सुख-समृद्धि और सभी लोगों के स्वस्थ जीवन की कामना की. ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा गांव भक्तिमय माहौल में डूब गया.

सदियों पुरानी आस्था की मिसाल : धमतरी के उमरगांव में आज भी जीवंत है माता पहुंचानी की परंपरा, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल - Haribhoomi

लोक आस्था से जुड़ी है यह परंपरा

ग्रामीणों का मानना है कि पुराने समय में जब गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं थीं, तब मौसमी बीमारियों से बचाव और गांव की रक्षा के लिए शीतला माता की विशेष पूजा की जाती थी. इसी विश्वास के साथ माता पहुंचानी की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी उसी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है, इस पर्व को कई क्षेत्रों में जुड़वास के नाम से भी जाना जाता है. लोक मान्यता के अनुसार, ‘जुड़’ शीतलता और संतुलन का प्रतीक है. गर्मी के मौसम के बाद वर्षा के स्वागत, अच्छी खेती, प्राकृतिक संतुलन और गांव की खुशहाली की कामना के साथ यह पर्व मनाया जाता है.

लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर

विशेषज्ञों का मानना है कि माता पहुंचानी किसी एक पौराणिक कथा पर आधारित नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सामाजिक आस्था से जुड़ा उत्सव है. इस आयोजन के माध्यम से गांव के लोग एकजुट होते हैं, प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करते हैं, तेजी से बदलते समय में भी उमरगांव की यह परंपरा लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है. माता पहुंचानी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का जीवंत प्रतीक बन चुकी है.

यह भी पढ़ें : CG News: छत्तीसगढ़ में 32 जलाशयों पर लगेंगे फ्लोटिंग सोलर प्लांट, 2000 मेगावाट हरित बिजली उत्पादन का लक्ष्य

Vindhya Times
Author: Vindhya Times

विन्ध्या टाइम्स वेब बेस्ड न्यूज़ चैनल है जो विन्ध्य क्षेत्र में एक सार्थक,सकारात्मक और प्रभावी रिसर्च बेस्ड पत्रकारिता के लिए अपनी जाना जाता है.चैनल के माध्यम से न्यूज़ बुलेटिन, न्यूज़ स्टोरी, डाक्यूमेंट्री फिल्म के साथ-साथ विन्ध्य क्षेत्र और मप्र. की ख़बरों को प्रसारित किया जाता है. विन्ध्य क्षेत्र की राजनीति, युवा, सांस्कृतिक, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कल्चर, फ़ूड, और अन्य क्षेत्र में एक मजबूत पत्रकारिता चैनल का उद्देश्य है. विन्ध्या टाइम्स न्यूज़ चैनल की ख़बरों को आप चैनल की वेबसाइट-www.vindhyatimes.in एवं एंड्राइड बेस्ड एप्लीकेशन के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही साथ फेसबुक पेज- https://www.facebook.com/vindhyatimesnews और ट्वीटर में -@vindhyatimes से भी आप ख़बरों को पढ़ सकते हैं. जुड़े रहिये हमारे साथ |

Leave a Comment

और पढ़ें